गीत ग़ज़लसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

नरसिंह कुमार ‘मयूर’ की एक गज़ल

पहाड़ी क्षेत्रों में देव-परंपरा के नाम पर अंधविश्वास, सामाजिक रूढ़ियों और महिलाओं के अमानवीय उत्पीड़न पर प्रहार करती एक भावुक…

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नरसिंह कुमार ‘मयूर’ की कविता- देश का भविष्य: गांव का स्कूल

कविता देश का भविष्य: गांव का स्कूल नरसिंह कुमार ‘मयूर’   सीलन भरी दीवारें हैं, और, टूटा पड़ा मकान, इसी…

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स्वाभिमान का पर्व: संविधान और क्रांति का आह्वान

आज़ादी की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर देश के अमर शहीदों, क्रांतिवीरों और संविधान निर्माताओं के सपनों, समता और स्वाभिमान…

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नरसिंह कुमार ‘मयूर’ की कविता – न्याय-व्यवस्था की दहलीज़ पर

कविता न्याय-व्यवस्था की दहलीज़ पर नरसिंह कुमार ‘मयूर’   धर्म-ध्वज के पीछे छुपकर, जो नफ़रत का विष घोलते हैं, उकसावे…

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नरसिंह कुमार ‘मयूर’ की कविता- न्याय की गुहार

इंसानियत को शर्मसार करती मध्यप्रदेश की दर्दनाक घटना, पीड़िता के अदम्य साहस और न्याय की गुहार को व्यक्त करती नरसिंह…

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नरसिंह कुमार ‘मयूर’ की कविता – मंचन सत्य का

कविता मंचन सत्य का नरसिंह कुमार ‘मयूर’ भगवा की ओढ़ के चादर, जो छल का खेल रचाते हैं, धर्म-कर्म की…

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नरसिंह कुमार मयूर की कविता- हमला

कविता हमला नरसिंह कुमार मयूर   बेटियों के स्वाभिमान पर, जब भी हमला होता है, सभ्यता का हर आवरण, सहम…