जसवीर त्यागी की छह कविताएं
1
गेंदे के फूल
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गमले में लगे गेंदे पर
दो फूल खिले हैं
उनकी मासूमियत की महक
खींच लेती है अनायास अपनी ओर
सिर चढ़कर बोलता है पीले रंग का जादू
क्या नाता है मेरा उनसे?
कोई काम न होने पर भी
पाँव अपने आप उठ जाते हैं उस तरफ
जहाँ एकांत में
अकेले मुस्कुराते रहते हैं
गेंदे के फूल।
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2
पृथ्वी का सौंदर्य
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पिता कहते थे
जीवन में झुककर चलना सदा
मुँह उठाकर चलने से ठोकर लगती है
पिता की शिक्षा का पालन करता हूँ
झुककर चलता हूँ
झुककर चलने से
पृथ्वी के अनंत सौंदर्य से जुड़ता हूँ।
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3
यह संभव है
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ऐसा नहीं
जो आपके पैर छू रहा है
वह आपका हितैषी हो
और जो आपके सम्मुख
शीश ताने खड़ा है
वह आपका विरोधी हो
यह भी संभव है
जो आपका चरण स्पर्श कर रहा है
उसकी चरम चाह हो
कि एक दिन आप भी उसके चरणों में नत हों
और जो आपके सामने अडिग खड़ा है
उसकी सदिच्छा हो
कि आप किसी के समक्ष कभी झुके नहीं
सदा अडिग रहें।
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4
रोता हुआ बच्चा
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तीन-चार साल का
रोता हुआ बच्चा
आतकंवाद,जिहाद कुछ नहीं जानता-समझता
उसे चॉकलेट,खेल-खिलौने
कार-स्कूटर की सवारी नहीं चाहिए
उसे तो बस
संसार से विदा हो चुके
अपने पापा चाहिए
उसके आँसू और सिसकियाँ देखकर
मोम पत्थर हो सकता है
और पत्थर पिघल सकते हैं
सबसे बड़ा धर्म
बच्चों का हँसना-खिलखिलाना
और उनका अपनों के साथ होना है
सबसे बड़ा अधर्म
बच्चों को रुलाना
और उनको यतीम करना है।
5
संगीत
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एक नवजात
शिशु की किलकारी
संसार के
समस्त संगीत पर भारी।
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6
बच्चे की ख़ुशी
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पड़ोस के सामने वाले घर में
नया किरायेदार आया है
उनका पाँच साल का छोटा बच्चा
खिड़कियों से
गलियारे की ओर झाँकता है
आते-जाते अनजान लोगों को ताकता है
राह से जाता हुआ कोई बच्चा
जब दिख जाता है उसे
तो खिड़कियों से झाँकते बच्चे के मुख पर
एक चंचल-सी ख़ुशी खेलने लगती है
जैसे चिड़िया का कोई बच्चा
फुदकता हो फूलों की शाख पर।
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