हरित क्रांति की राह दिखाने वाले डॉ रामधन सिंह

हरित क्रांति की राह दिखाने वाले डॉ रामधन सिंह

  • महान कृषि वैज्ञानिक ने गेहूं सी 306 और बासमती-370 ईजाद की

 

रणबीर सिंह दहिया

 

किसान-पुत्र महान् कृषि वैज्ञानिक डा. रामधन सिंह जी ने गुणवत्ता में सर्वोत्तम गेंहू C306, बासमती-370 ईजाद करके 1925-45 में दुनिया को हरितक्रांति की राह दिखाई!

जिस महान् मानव के कारण दुनिया के 100 करोड़ लोग भूखे मरने से बचे (1960 के दशक में) उनको जानें……..!!!

जी ,मैं बात कर रहा हूँ “हरित क्रांति” के अग्रदूत विश्व-विख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. रामधन सिंह हुड्डा जी की।

1 मई 1891 में रोहतक जिले के किलोई गांव में साधारण किसान के घर इस असाधारण बालक ने जन्म लिया। लंदन में कैंब्रिज विश्वविद्यालय से प्राकृतिक विज्ञान और कृषि में Ph.D करने के बाद 1925 में Punjab Agriculture College and Research Institute ,Layallpur(Punjab) में प्रिंसिपल लगे। 1947 में रिटायरमेंट तक वहीं रहकर भारत ही नहीं, दुनिया के लिए नई नई किस्में इज़ाद की गेहूं, जौ, धान, दाल, गन्ना की।

Canada और Mexico ने सबसे पहले इनकी गेहूं C-591 अपनाई और पैदावार के रिकॉर्ड बनाये।

C-217,C-228, 250, 253, 273, 281 और C-285, C-518 उनकी मुख्य गेहूं varieties हैं।

जिस C-306 गेहूं को सबसे स्वादिष्ट माना जाता है उसे डॉ. रामधन सिंह जी ने ईज़ाद किया था। संसार में मशहूर बासमती चावल 370 और Jhona 349 भी डॉ. रामधन जी की ही देन हैं।

उनके योगदान का अंदाजा यों लगा सकते हो, जिसको मैक्सिको से नोबल पुरस्कार विजेता डॉ. नॉरमन ई बारलोग 1963 में डॉक्टर रामधन सिंह जी से सोनीपत उनके घर पर मिलने आए और रामधन सिंह जी के पैर छू कर कहें – आपने संसार को बेहतर किस्में देकर 100 करोड़ लोगों को भूखे मरने से बचा लिया – और खुशी से रो दिए।

1965 में लाल बहादुर शास्त्री जी ने डॉ. रामधन सिंह जी को किसी भी राज्य के Governor बनने के लिए कहा था लेकिन डॉक्टर रामधन सिंह जी ने कहा राज्यपाल बनने से ज्यादा भला मैं वैज्ञानिक के तौर पर कर सकता हूँ देश का। और उन्होंने ऐसा किया भी।

1961 में पाकिस्तान ने डॉ रामधन सिंह जी को राष्ट्रपति गोल्ड मैडल से सम्मानित किया और वह यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय बने।

17 अप्रैल 1977 को डॉ रामधन सिंह जी इस संसार को अलविदा कह गए लेकिन सबको जिंदा रहने के लिए अथाह अनाज भंडार दे गए।

हम क्यों नही जन्मदिन मनाते उनका?खाते हैं 306, 370 और चूसते हैं गन्ना 312 जिनका?सबको बताएं महान् किसान पुत्र की महान् देन दुनिया को।

डॉ रामधन सिंह जी अमर हैं।

लेखक-  रणबीर सिंह दहिया

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