डॉ रीटा अरोड़ा की लघु कथा – सबसे खूबसूरत दौलत

युवाओं, अब यह स्वतंत्रता की मशाल तुम्हारे हाथों में है। इसे केवल संभालना नहीं, और अधिक उज्ज्वल बनाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां गर्व से कह सकें - “हमारे पूर्वजों ने हमें आज़ादी दी थी, और हमने उस आज़ादी को सम्मान, एकता और कर्म से जीवित रखा।”

लघु कथा

सबसे खूबसूरत दौलत

डॉ रीटा अरोड़ा

 

“कभी-कभी सोचती हूँ, सौभाग्य आखिर होता क्या है?” मीरा ने चाय का कप रखते हुए पूछा।

सुमन मुस्कुराई, “पैसा? सफलता? या हर चीज़ का मिल जाना?”

“नहीं… शायद कुछ और।”

“तो फिर?”

मीरा कुछ पल चुप रही।

“मेरे पास सब कुछ है। घर है, पैसा है, बच्चे हैं… फिर भी कभी-कभी लगता है, कोई अपना नहीं।”

सुमन ने धीरे से पूछा, “किसी से बात करने का मन होता है?”

“बहुत।”

“फिर करती क्यों नहीं?”

मीरा हँसी, “डर लगता है।”

“किस बात का?”

“कि सामने वाला मुझे समझेगा नहीं।”

सुमन ने उसका हाथ थाम लिया।

“तुम बस इतना कहकर देखो- ‘मुझे तुमसे बात करनी है।’”

मीरा की आँखें भर आईं।

“अगर उसने पूछा ही नहीं कि क्या हुआ?”

सुमन ने बिना कुछ कहे उसकी ओर देखा।

कुछ देर बाद मीरा का फोन बजा।

स्क्रीन पर बेटे का नाम था।

उसने फोन उठाया।

“हाँ माँ, बोलो।”

मीरा चुप रही।

“माँ… क्या हुआ?”

उसकी आँखों से आँसू बह निकले।

“कुछ नहीं बेटा… बस आज तुम्हारी आवाज़ सुनने का मन था।”

उधर कुछ पल खामोशी रही।

फिर बेटे की धीमी आवाज़ आई-

“माँ, मैं हूँ… बोलो।”

मीरा ने आँखें बंद कर लीं।

शायद किसी का ‘मैं हूँ’ कह देना ही जीवन की सबसे बड़ी दौलत है।

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