Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

डॉ रीटा अरोड़ा की लघुकथा – जीत की असली कीमत

लघुकथा जीत की असली कीमत डॉ रीटा अरोड़ा   आश्रम में एक दिन गुरुजी ने देखा, उनका प्रिय शिष्य नीरज…

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डॉ रीटा अरोड़ा की लघुकथा – बुढ़ापा अब मजबूरी नहीं, मस्ती है

लघुकथा बुढ़ापा अब मजबूरी नहीं, मस्ती है डॉ रीटा अरोड़ा “अरे भाई साहब, आजकल आप पार्क में कम दिखाई देते…

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डॉ रीटा अरोड़ा की लघुकथा – जीभ और दाँत

लघुकथा जीभ और दाँत डॉ रीटा अरोड़ा   गाँव की साँझ थी। नीम के नीचे दादाजी चारपाई पर बैठे थे।…

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डॉ रीटा अरोड़ा की लघु कथा – रिश्तों का नमक

लघु कथा रिश्तों का नमक डॉ रीटा अरोड़ा   “पापा, फिर शर्मा अंकल के घर? उनके अपने बेटे हैं, हमारी…

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डॉ रीटा अरोड़ा की लघु कथा – बेफ़िक्री का रिश्ता

लघुकथा बेफ़िक्री का रिश्ता डॉ रीटा अरोड़ा   “माँ, मैं शादी क्यों करूँ? अच्छी नौकरी है, अपना पैसा है, अपनी…

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डॉ रीटा अरोड़ा की लघु कथा – लोग क्या कहेंगे… और लोग क्या करेंगे?

लघु कथा लोग क्या कहेंगे… और लोग क्या करेंगे? ~ डॉ रीटा अरोड़ा   “पापा, नौकरी छोड़कर अपना काम शुरू…

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डॉ रीटा अरोड़ा की लघु कथा – बस, अब कुछ नहीं कहना…

लघु कथा बस, अब कुछ नहीं कहना… डॉ रीटा अरोड़ा “सुनिए, दवा समय पर ले लेना। हम दोनों अब सीनियर…

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डॉ रीटा अरोड़ा की लघु कथा-घुटन

लघु कथा घुटन डॉ रीटा अरोड़ा कमरे की खिड़की खुली थी, फिर भी नेहा को साँस घुटती-सी महसूस हो रही…

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डॉ रीटा अरोड़ा की लघुकथा – दिल के किसी कोने में

लघुकथा दिल के किसी कोने में डॉ रीटा अरोड़ा   “तुम्हें पता है, तुम बहुत ज़िद्दी हो!” राधा ने नाराज़…

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डॉ रीटा अरोड़ा की लघु कथा – जिम्मेदारी थी या जीवनसाथी ?

  लघु कथा ज़िम्मेदारी थी या जीवनसाथी? डॉ रीटा अरोड़ा     चालीस साल की शादी में पहली बार शरद…