Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

राजकुमार कुम्भज की कविता – दिल्ली दृश्य

कविता दिल्ली दृश्य राजकुमार कुम्भज दिल्ली के ताज़ा विरोध-प्रदर्शन ने भाषा और संस्कार-संस्कृति के सभी तटबंध ध्वस्त कर दिए हैं.हैरानी…

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राजकुमार कुम्भज की कविता – जी रामजी

कविता जी रामजी राजकुमार कुम्भज की   वंदे मातरम् वंदे माताराम वंदे भ्राताराम वंदे तोताराम वंदे छोटाराम वंदे मोटाराम भारतमाता…

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राजकुमार कुम्भज की तीन कविताऍं

राजकुमार कुम्भज की तीन कविताऍं _______ 1. जो अभी तक हुआ नहीं. ________ जो अभी तक हुआ नहीं कल तक…

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राजकुमार कुम्भज की कविता – सिखाया पिता ने यही सिखाया

पितृ दिवस पर विशेष कविता सिखाया पिता ने यही सिखाया राजकुमार कुम्भज सिखाया पिता ने यही सिखाया हार जाना पर…

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राजकुमार कुम्भज की दो कविताऍं.

राजकुमार कुम्भज की दो कविताऍं. 1. एक ओस-कण है आदमी   दूसरों को अज्ञानी समझते हुए ख़ुद को चरम ऋषि…

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राजकुमार कुम्भज की तीन कविताऍं

राजकुमार कुम्भज की तीन कविताऍं 1. फूलों के रॅंग सपनों में   फूलों के रॅंग सपनों में ज़रुरी तो नहीं…

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राजकुमार कुम्भज की कविता- कहलाती है माँ

कविता कहलाती है माँ राजकुमार कुम्भज   हथेलियों में नरम धूप और पलकों पर सपनों की राख लिए क़दम-क़दम नापती…

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राजकुमार कुम्भज की तीन कविताएँ

राजकुमार कुम्भज की तीन कविताएँ 1. ये धिक्कार बने औज़ार ऊॅंचाइयों पर खड़ा एक आदमी नीचे ज़मीन पर देखता है…

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राजकुमार कुम्भज की दो कविताऍं

विश्व पुस्तक दिवस पर विशेष राजकुमार कुम्भज की दो कविताऍं. ___________________ 1. आत्मा का मोक्ष हैं पुस्तकें.   काॅंप रहा…