HomeBlogराजकुमार कुम्भज की कविता – जी रामजी राजकुमार कुम्भज की कविता – जी रामजी 7 July 2026Pratibimb Media कविता जी रामजी राजकुमार कुम्भज की वंदे मातरम् वंदे माताराम वंदे भ्राताराम वंदे तोताराम वंदे छोटाराम वंदे मोटाराम भारतमाता की जै राजमाता की जै संपत्तिराय की जै चंपतराय की जै और ये रामजी किधर है भाया? नहीं मालूम,मैं तो बैंकाक गया था जी रामजी! ————- Post Views: 155
कीटनाशक आधारित कृषि मॉडल बदलना जरूरी खेती-किसानी कीटनाशक आधारित कृषि मॉडल बदलना जरूरी कुलभूषण उपमन्यु 1960 के दशक में भारतवर्ष को अन्न संकट का सामना करना…
भाजपा सांसदों सारंगी, राजपूत, कोन्याक को ‘अभिनय’ के लिए पुरस्कार दिए जाने चाहिए : जया बच्चन संसद परिसर में धक्का मुक्की के दौरान भाजपा सांसदों के घायल पर सपा सांसद ने दी प्रतिक्रिया नयी दिल्ली। वीरवार…
पश्चिम बंगालः नौकरी खो चुके ग्रुप सी और ग्रुप डी श्रमिकों के लिए मासिक अनुदान को मंजूरी! पश्चिम बंगालः नौकरी खो चुके ग्रुप सी और ग्रुप डी श्रमिकों के लिए मासिक अनुदान को मंजूरी! ग्रुप सी कर्मचारियों…