HomeBlogराजकुमार कुम्भज की कविता – जी रामजी राजकुमार कुम्भज की कविता – जी रामजी 7 July 2026Pratibimb Media कविता जी रामजी राजकुमार कुम्भज की वंदे मातरम् वंदे माताराम वंदे भ्राताराम वंदे तोताराम वंदे छोटाराम वंदे मोटाराम भारतमाता की जै राजमाता की जै संपत्तिराय की जै चंपतराय की जै और ये रामजी किधर है भाया? नहीं मालूम,मैं तो बैंकाक गया था जी रामजी! ————- Post Views: 251 Like 0 0 Comments
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