‘नील द सील’: जिसने शरारतों से जीता दुनिया का दिल, दी सह-अस्तित्व का सीख

‘नील द सील’: जिसने शरारतों से जीता दुनिया का दिल, दी सह-अस्तित्व का सीख

 

सायिया नाहिर बार्टिस

 

ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया राज्य की सड़कों पर कभी आराम फरमाना तो कभी सड़क किनारे खड़ी कारों पर चढ़ जाना, इन्हीं अजीबोगरीब हरकतों ने ‘नील’ नाम से मशहूर विशाल समुद्री जीव ‘सील’ को रातोंरात सोशल मीडिया पर लोकप्रियता दिला दी है।

करीब एक टन वजनी यह पांच वर्षीय नर दक्षिणी एलिफेंट सील (एक प्रकार का समुद्री स्तनधारी प्राणी) अक्टूबर 2020 में तस्मान प्रायद्वीप में पैदा हुआ था। तब से वह हर साल तस्मानिया लौटता रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि सील की कई प्रजातियां नियमित रूप से अपने जन्मस्थल और उन स्थानों पर वापस आती हैं, जहां वे प्रजनन करती हैं या आराम करती हैं।

पिछले कुछ वर्षों में नील को दक्षिणी तस्मानिया के ‘सेवन माइल बीच’ की सड़कों पर आराम फरमाते हुए, यहां तक कि सड़क किनारे खड़ी कारों पर चढ़ते हुए भी देखा गया। उसकी ये शरारतें लोगों को खूब हंसाती रहीं, लेकिन इन मजेदार हरकतों के पीछे दुनिया की सबसे बड़ी सील प्रजाति के व्यवहार को समझने का एक दुर्लभ अवसर भी छिपा है।

नील हमें यह भी सिखाता है कि समुद्री जीवों के साथ कैसे सुरक्षित और जिम्मेदारीपूर्ण ढंग से रहा जाए, क्योंकि भविष्य में इंसानों और वन्यजीवों का आमना-सामना और बढ़ने की आशंका है।

जब आराम सबसे जरूरी हो :

जरा कल्पना कीजिए कि दिन भर की लंबी यात्रा, काम निपटाने या लगातार बैठकों में भाग लेने के बाद आप थककर आराम करने लेटें और तभी सैकड़ों लोग आपके चारों ओर सिर्फ आपकी तस्वीरें लेने के लिए एकत्र हो जाएं।

दक्षिणी एलिफेंट सील के साथ कुछ ऐसा ही होता है।

इन समुद्री स्तनधारियों के लिए आराम बेहद आवश्यक है। उपग्रह आधारित निगरानी अध्ययनों से पता चला है कि ये समुद्री प्राणी भोजन की तलाश में महीनों तक समुद्र में रहते हैं और दक्षिणी महासागर में हजारों किलोमीटर की यात्रा करते हैं। इसलिए जब वे वर्ष में सामान्यतः दो बार तट पर लौटते हैं, तो उन्हें पूरी तरह विश्राम की आवश्यकता होती है।

इसके अलावा, हर साल इनके शरीर में एक पूर्ण केश-परिवर्तन (कैटास्ट्रॉफिक मोल्ट) होता है, जिसमें इनके बालों के साथ त्वचा की ऊपरी परत भी झड़ जाती है। यह प्रक्रिया शरीर से काफी ऊर्जा लेती है, इसलिए उसके बाद इन्हें आराम कर अपनी ऊर्जा फिर से जुटाने की जरूरत पड़ती है।

वैज्ञानिक इस विश्राम अवधि को ‘हॉल-आउट’ अवधि कहते हैं। यदि इस दौरान कोई व्यक्ति सील को छूने, हटाने या बहुत करीब जाने की कोशिश करे, तो इससे वह तनावग्रस्त हो सकती है। इतना ही नहीं, इससे सील और आसपास मौजूद लोगों दोनों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

नील की शरारतों के पीछे की असली कहानी :

वायरल वीडियो में, नील सड़कों पर लगाये गए शंकु की आकृत्ति के प्लास्टिक के अवरोधक को कभी धक्का देते दिखाई देता है, तो कभी खड़ी कारों पर चढ़ जाता है और कभी लोगों के पीछे भागता नजर आता है।

लेकिन सवाल यह है कि वह ऐसा क्यों करता है?

इसका जवाब जितना सरल है, उतना ही दिलचस्प भी।

हर युवा नर एलिफेंट सील की तरह नील भी दूसरी सील का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहता था। लेकिन आसपास कोई दूसरी सील न होने के कारण उसका यह व्यवहार इंसानों और उनके आसपास मौजूद चीजों की ओर उन्मुख हो गया।

युवा नर सील कई वर्षों तक अपने शरीर का आकार, ताकत और व्यवहार विकसित करते हैं ताकि भविष्य में दूसरे नर सील से मुकाबला कर सकें। बड़े होने पर उन्हें प्रजनन क्षेत्र और मादा सील के लिए प्रतिस्पर्धा करनी होती है। प्रभुत्व स्थापित करना, अपनी शक्ति आजमाना और नयी चीजों को परखना- ये सब उनके स्वाभाविक विकास का हिस्सा है।

इसी कारण नील कभी शंकु की आकृति वाले यातायात अवरोधक, कभी सड़क किनारे लगे खंभे और कभी खड़ी कारों को अपनी जिज्ञासा और ताकत दिखाने का माध्यम बना लेता है।

जब हम उसके व्यवहार को समझते हैं, तब एहसास होता है कि जो चीज हमें मजाकिया या डरावनी लगती है, वह दरअसल उस जानवर के लिए बिल्कुल सामान्य व्यवहार है।

नील हमें क्या सिखाता है :

नील की कहानी इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि जब वैज्ञानिक, वन्यजीव प्रबंधन एजेंसियां, स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आम नागरिक मिलकर काम करते हैं, तो इंसानों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

जैसे-जैसे नील सोशल मीडिया का चहेता सितारा बनता गया, वैसे ही अधिकारियों ने उसके संरक्षण के लिए विशेष प्रबंधन योजना तैयार की। उसके आसपास अस्थायी अवरोधक लगाए गए ताकि भीड़ उससे सुरक्षित दूरी बनाए रख सके। साथ ही लोगों को जागरूक किया गया कि वे नील से कम-से-कम 20 मीटर की दूरी बनाए रखें और उसके साथ जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार करें।

मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ती मुलाकातों के दौर में ऐसी साझी पहल पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

हालांकि, वैज्ञानिक अभी पूरी तरह नहीं जानते कि ऐसे मामले क्यों बढ़ रहे हैं। इसकी एक वजह यह हो सकती है कि कुछ समुद्री जीवों की आबादी फिर से बढ़ रही है। साथ ही जलवायु परिवर्तन के कारण उनके प्राकृतिक आवास बदल रहे हैं, जिससे वे नए इलाकों की ओर जा रहे हैं।

नील अकेला ऐसा समुद्री जीव नहीं है जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा हो। कई बार ऐसी लोकप्रियता दुखद अंत का कारण भी बन जाती है।

ऐसा ही मामला फ्रेया नाम की वालरस (विशाल समुद्री स्तनपायी प्राणी) का था, जो नॉर्वे में नावों पर आराम करती थी। उसे देखने और उसकी तस्वीरें लेने के लिए लोग लगातार उसके बेहद करीब पहुंचने लगे, जबकि अधिकारियों ने बार-बार ऐसा न करने की चेतावनी दी थी।

आखिरकार, लोगों की सुरक्षा को देखते हुए नॉर्वे के अधिकारियों को भारी मन से फ्रेया का जीवन खत्म करने का कठिन फैसला लेना पड़ा।

यह निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है कि नील फिर तस्मानिया आएगा या नहीं, जैसा कि वह 2020 से हर साल आता रहा है। संभावना यही है कि फिलहाल वह दक्षिणी महासागर में भोजन की तलाश में होगा।

फिर भी ऑस्ट्रेलिया के अनेक लोग उसकी वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

चाहे नील लौटे या नहीं, उसकी असली विरासत केवल वायरल वीडियो या सोशल मीडिया की लोकप्रियता नहीं है। उसने हमें यह अमूल्य सीख दी है कि ऑस्ट्रेलिया के समुद्री तटों को वन्यजीवों के साथ साझा करने का अर्थ केवल उन्हें देखने का रोमांच नहीं, बल्कि उनके प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी है।

द कन्वर्सेशन से साभार

लेखिका डीकिन विश्वविद्यालय के स्कूल आफ लाइफ एंड एन्वायर्मेंटल साइंस में पीएचडी की शोधार्थी हैं।
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