Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

मुनेश त्यागी की कविता – … मैं पूरा हिंदुस्तान हूं

कविता … मैं पूरा हिंदुस्तान हूं मुनेश त्यागी   मैं आधा हिंदू हूं,आधा मुसलमान हूं, कोई माने ना माने,मैं पूरा…

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डा. स्वराजबीर की कविता – हम कॉकरोच हैं

कविता हम कॉकरोच हैं डा. स्वराजबीर   हम कॉकरोच हैं नौजवान हैं, मचलती हुई सोच हैं निज़ाम के पैरों में…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – ना जाने वो…

कविता ना जाने वो …  मंजुल भारद्वाज ना जाने वो कौन सी मिट्टी होती है जिसमें ज़िंदा क़ौम लहलहाती है…

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राजकुमार कुम्भज की तीन कविताऍं

राजकुमार कुम्भज की तीन कविताऍं 1. फूलों के रॅंग सपनों में   फूलों के रॅंग सपनों में ज़रुरी तो नहीं…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – तथ्य और सत्य

कविता तथ्य और सत्य मंजुल भारद्वाज तथ्य लोग धर्म में मुक्ति खोजते हैं सत्य धर्म मुक्ति नहीं गुलामी देता है!…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – अपने को मथती लेखनी

कविता अपने को मथती लेखनी मंजुल भारद्वाज   इंतज़ार कर रहा हूं घड़ियां गिन रहा हूं लिखते हुए सफ़र को…

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मुनेश त्यागी की कविता- सो, मुझे अब पढ़ना है   

दुनिया की बहू-बेटियों को समर्पित कविता सो, मुझे अब पढ़ना है    मुनेश त्यागी   बिना अनुरोध के, बिना प्रतिरोध…

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राजकुमार कुम्भज की कविता- कहलाती है माँ

कविता कहलाती है माँ राजकुमार कुम्भज   हथेलियों में नरम धूप और पलकों पर सपनों की राख लिए क़दम-क़दम नापती…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – माँ का सृजन सौन्दर्य

कविता माँ का सृजन सौन्दर्य  मंजुल भारद्वाज   एक माँ की सुंदरता सिर्फ़ उसका सृजन होता है स्त्री की सुंदरता…