जसवीर त्यागी की जरूरत और अन्य कविताएं

जसवीर त्यागी की जरूरत और अन्य कविताएं

जरूरत

स्कूल से घर लौटते हुए
बेटी ने कहा –
पापा,किसी बूढ़े आदमी के रिक्शा में बैठना
मैंने पूछा-क्यों?

वह बोली-
हर किसी को जल्दी है
मंजिल पर पहुँचने की
जवान के रिक्शे पर बैठते हैं ज्यादातर लोग

बूढ़े रिक्शा धीरे खींचते हैं
कम मिलती है सवारी
उन्हें भी पैसों की जरूरत होती होगी
तभी चलाते हैं रिक्शा

वरना किसे अच्छा लगता है
आराम करने की उम्र में काम करना।

दुलार

गमलों में अलग-अलग
किस्म के पौधें और बेलें हैं

एक गमले का पौधा
जो कभी हरा-भरा था
इन दिनों उदास है

दूसरे-तीसरे दिन
पौधों में पानी लगाता हूँ
पानी पीकर
शिशुओं की तरह निश्चल हँसी हँसते हैं पौधें

खाद-पानी के दौरान
मैं उदास पौधे को भी
दूसरे हरे-भरे पौधों की तरह दुलारता हूँ

जो आज उदास है
सदा उदास ही रहेगा
यह जरूरी तो नहीं

संभव है,पानी और प्यार पाकर
वह भी मुस्कुरा दे एक दिन।

रचना

बहुत दिनों से
कोई कविता नहीं लिखी

एक गरीब बच्चे का
पाठशाला में नाम लिखवाया

एक नया पौधा लगाया

अस्पताल में
रोगियों से मिलकर आया

एक पुरानी पुस्तक पर
जिल्द बंधवाकर लाया

रूठे हुए एक परिजन को मनाया

कुछ इस तरह
मैंने जीवन काव्यमय बनाया।

0