मंजुल भारद्वाज की कविता – तथ्य और सत्य

कविता

तथ्य और सत्य

मंजुल भारद्वाज

तथ्य लोग धर्म में मुक्ति खोजते हैं
सत्य धर्म मुक्ति नहीं गुलामी देता है!

तथ्य लोग ईश्वर को मानते हैं
सत्य ईश्वर है ही नहीं !

तथ्य लोग पुनर्जन्म मानते हैं
सत्य पुनर्जन्म नहीं होता !

तथ्य लोग हिंसा में श्रेष्ठत्व खोजते हैं
सत्य हिंसा सबसे नीच कर्म है !

तथ्य लोग अहिंसा को कायरता समझते हैं
सत्य अहिंसा आत्मबल और विवेक जगाती है!

तथ्य लोग लोकप्रियता को सफ़लता मानते हैं
सत्य लोकप्रियता घातक होती है!

तथ्य लोग बाज़ारवाद को विकास समझते हैं
सत्य बाज़ारवाद विध्वंस है!

तथ्य लोग वर्णवाद को संस्कृति मानते हैं
सत्य वर्णवाद मानवता पर कलंक है!

तथ्य लोग सच जानना चाहते हैं
सत्य सच लिखने वाले से लोग दूर चले जाते हैं