Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

राजकुमार कुम्भज की दो कविताऍं.

राजकुमार कुम्भज की दो कविताऍं. 1. एक ओस-कण है आदमी   दूसरों को अज्ञानी समझते हुए ख़ुद को चरम ऋषि…

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राजकुमार कुम्भज की तीन कविताऍं

राजकुमार कुम्भज की तीन कविताऍं 1. फूलों के रॅंग सपनों में   फूलों के रॅंग सपनों में ज़रुरी तो नहीं…

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राजकुमार कुम्भज की कविता- कहलाती है माँ

कविता कहलाती है माँ राजकुमार कुम्भज   हथेलियों में नरम धूप और पलकों पर सपनों की राख लिए क़दम-क़दम नापती…

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राजकुमार कुम्भज की तीन कविताएँ

राजकुमार कुम्भज की तीन कविताएँ 1. ये धिक्कार बने औज़ार ऊॅंचाइयों पर खड़ा एक आदमी नीचे ज़मीन पर देखता है…

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राजकुमार कुम्भज की दो कविताऍं

विश्व पुस्तक दिवस पर विशेष राजकुमार कुम्भज की दो कविताऍं. ___________________ 1. आत्मा का मोक्ष हैं पुस्तकें.   काॅंप रहा…

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राजकुमार कुम्भज की दो कविताऍं

विश्व पृथ्वी दिवस पर विशेष राजकुमार कुम्भज की दो कविताऍं 1. ये कविता,यें पृथ्वी.   विश्वास है, पृथ्वी है, मैं…

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राजकुमार कुम्भज की तीन कविताऍं

राजकुमार कुम्भज की तीन कविताऍं 1 कोई छूट रहा है पीछे   भागता नहीं हूॅं शिक़ायतों से दंड-प्रहारों से भी…

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राजकुमार कुम्भज की चार कविताऍं

राजकुमार कुम्भज की चार कविताऍं 1. एक अंधा आदमी   वक़्त ऐसा भी आता है जीवन में जब खोने को…

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राजकुमार कुम्भज की तीन कविताऍं

राजकुमार कुम्भज की तीन कविताऍं 1. एक अंधा आदमी   वक़्त ऐसा भी आता है जीवन में जब खोने को…