देवेन्द्र कुमार चौधरी की कविता – दुख अनश्वर है

कविता

दुख अनश्वर है

देवेन्द्र कुमार चौधरी

 

हम घिरे रहते हैं दुख से
और जीवन भर भटकते रहते हैं
सुख की खोज में
मानो दुख परे हो इस देह से
और सुख
पुराना आत्मीय साथी

दुख अनश्वर है
और सुख नश्वर

इस अवधारणा में
सुख एक क्षणभंगुर वस्तु है
और दुख
अनवरत साथ रहने वाली छाया

फिर भी हम
दुख की परिधि से बाहर निकलकर
सुख की खोज में
दिन-रात डूबे रहते हैं
यह सोचकर
कि सुख स्थायी है

लेकिन जीवन-जगत के इस वृत्त में
एक सुखी व्यक्ति भी
दुख से बाहर कहाँ निकल पाता है?

दुख बना रहता है
सुख के भीतर भी
और हम
कि दुख के भीतर भी
खोजते रह जाते हैं सुख।

One thought on “देवेन्द्र कुमार चौधरी की कविता – दुख अनश्वर है

  1. बेहतरीन चिंतन

Comments are closed.