Blogगीत ग़ज़लसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

रविन्द्र कुमार ‘रवि’ की एक ग़ज़ल

रविन्द्र कुमार ‘रवि’ की एक ग़ज़ल   पेट की उदासी को,रोटियां समझती हैं। बंदरों की चालें कब, बिल्लियां समझती हैं।…

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राजेश भारती की कविता – काॅकरोच

  राजेश भारती की कविता – काॅकरोच मेरी पत्नी चीख़ी मैंने कहा डरो मत ये तो बस हमारी व्यवस्था का…