मुनेश त्यागी की कविता – पितृ दिवस के मौके पर

हमारे पिता जी  पढ़े लिखे  नहीं थे। पिता जी के साथ हमारे तीन ताऊजी भी शामिल हैं। हमारे दो ताऊजी स्वतंत्रता सेनानी थे। उन सभी की सीख और शिक्षायें कमाल की थीं। उनकी सीख को मैंने कविता के रूप में ढालने की कोशिश की है। यह पितृ दिवस को समर्पित है – मुनेश त्यागी 

कविता

पितृ दिवस के मौके पर

मुनेश त्यागी

 

,,, कम खाओ और गम खाओ,
,,,कभी परेशानी नही होगी,
,,,औरों की परवाह मत करो,
,,,अपने सत कर्म करते रहो।

,,,सच्चे काम की, सदा होड करो,
,,,भलाई का हमेशा साथ दो ,
,,,बच्चों की शिक्षा के लिए खर्च करने से मत डरो,
,,,किसी भी गलत का पक्ष मत लेना।

,,,अपना काम करने में कोई शर्म मत करो,
,,,ईमानदारी का हमेशा साथ दो,
,,,गलत संगति में बैठने से हमेशा बचो,
,,,सज्जनों का सदैव साथ रखो।

,,,सीखने में कैसी शर्म?
,,,गलत लोगों के साथ मत रहो,
,,,मेहनत करना कभी मत छोड़ना,
,,,मां बाप का, अपने बडों का हमेशा सम्मान और सत्कार करो।

,,,मेहनत, बियाबान जंगलों में भी बहार ले आती है,
,,,मेहनत ही सब कुछ है, इसका दामन कभी मत छोडिये,
,,,गम और परेशानियों से मत घबराइये,
,,,उनका डट कर मुकाबला करो।

,,,बुराई का साथ कभी मत दीजिए,
,,,जैसा व्यवहार अपने साथ चाहते हो,
,,,वैसा ही दूसरों के साथ कीजिये,

,,,खाना हमेशा मिलजुलकर और बांटकर खाईये,
,,,सबके साथ और सबके सामने खाईये,
,,,इससे कभी भी पारिवारिक कलह नही होगी और संयुत परिवार बना रहेगा।

,,,अपनी ताकत से ज्यादा खर्च मत कीजिए,
,,,हमेशा मोटा खाओ, मोटा पहनो,
,,,हमेशा सादा जीवन, उच्च विचार,
,,,संयम और सदाचार हमेशा बनाये रखिये।

,,,हौंसला कभी मत खोईये,
,,,जीवन में अनुशासन सदैव बनाये रखिये,
,,,सही फैसले पर कभी भी छींटाकशी मत कीजिए,
,,,गलत प्रवृतियों की हमेशा आलोचना करो।

,,,बिना सोचे समझे कोई काम मत करना,
,,,परिवारिक सदस्यों में कभी भी भेदभाव मत करना,
,,,यही परिवार की सफलता की कुंजी है।