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जयपाल की कविता – हमला हुआ

युद्ध के विरुद्ध युद्ध-17 कविता हमेशा युद्ध के खिलाफ़ खड़ी रही है, भले ही तानाशाह युद्ध को राष्ट्रवादी गौरव बताकर…

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जयपाल की युद्ध के बाद के  हालात पर तीन कविताएं

युद्ध के विरुद्ध युद्ध-16   कविता हमेशा युद्ध के खिलाफ़ खड़ी रही है, भले ही तानाशाह युद्ध को राष्ट्रवादी गौरव…

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जयपाल की कविता- गज़ा-पट्टी

युद्ध के विरुद्ध युद्ध-15 कविता हमेशा युद्ध के खिलाफ़ खड़ी रही है, भले ही तानाशाह युद्ध को राष्ट्रवादी गौरव बताकर…

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जयपाल की दो कविताएं- युद्ध के बाद

युद्ध के विरुद्ध युद्ध-12 कविता हमेशा युद्ध के खिलाफ़ खड़ी रही है, भले ही तानाशाह युद्ध को राष्ट्रवादी गौरव बताकर…

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जयपाल की ‘चलते-चलते’ चार लघु कविताएं 

 चलते-चलते चार लघु कविताएं  जयपाल 1  उसका नाम   स्कूल के दिनों की बात है हड्डियां चमकती थी उसकी कपड़े…

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समकालीन क्रूर-व्यवस्था पर व्यंग्य करती मानवीय संवेदना की पक्षधर कविताएं 

पुस्तक समीक्षा समकालीन क्रूर-व्यवस्था पर व्यंग्य करती मानवीय संवेदना की पक्षधर कविताएं जयपाल की कविताओं का रचनात्मक विश्लेषण मनजीत सिंह…

Blogसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

समय की शिराओं में धड़कती कविता : जयपाल का काव्य-संसार

पुस्तक समीक्षा समय की शिराओं में धड़कती कविता : जयपाल का काव्य-संसार प्रतिरोध, पुनर्सृजन और मानवीय अस्मिता का विमर्श  …