जयपाल की कविता- गज़ा-पट्टी

युद्ध के विरुद्ध युद्ध-15

कविता हमेशा युद्ध के खिलाफ़ खड़ी रही है, भले ही तानाशाह युद्ध को राष्ट्रवादी गौरव बताकर उसका महिमामंडन करते रहे हों। लेकिन उसकी कीमत आम आदमी ने ही चुकाई है (महमूद दरवेश)। बहरहाल जो युद्ध चल रहे हैं उनके नकारात्मक प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहे हैं । किसी भी युद्ध में जहां बच्चे और महिलाओं समेत नरसंहार होते हैं, वहीं इस विध्वंस से अंतरराष्ट्रीय सामाजिक जीवन भी तहस-नहस होता है।

प्रतिबिंब मीडिया साहित्यकारों की इस चिंता से भली-भांति वाकिफ़ है। ‘युद्ध के विरुद्ध युद्ध’ शीर्षक के तहत हम आपका युद्ध विरोधी साहित्य प्रकाशित करेंगे। आप अपनी कविताएं, कहानियों समेत रचनाएं हमें भेजिए, उन्हें प्रतिबिंब मीडिया पर ससम्मान प्रकाशित किया जाएगा। आज प्रस्तुत है   जयपाल की कविता  गज़ा  – पट्टी। संपादक

 

कविता

गज़ा-पट्टी

जयपाल

गज़ा-पट्टी
कहा जाता है फिलिस्तीन में है
लेकिन दुनिया के हर देश में पाई जाती है एक गज़ा-पट्टी

अमेरिका
गज़ा-पट्टी बनाने का सबसे बड़ा इंजीनियर है
ईरान ,इराक ,सीरिया अफगानिस्तान, फ़्रांस, जर्मनी वियतनाम, आदि कितने ही देश हैं
जहां जरूरत के अनुसार गज़ा-पट्टियां बनाई जाती हैं
गजा-पट्टियों के रास्ते ही आता है तानाशाह
इसी रास्ते से आता है राष्ट्रवाद
महात्मा का चोला पहन कर
पूरी दुनिया की सुरक्षा के नाम पर
देकर जाता है
विध्वंस, हिंसा और नरसंहार

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