ओमसिंह अशफ़ाक का लोक गीत- पिया घर क्यों ना आवै, हो रामजी!

लोक गीत

पिया घर क्यों ना आवै, हो रामजी!

ओमसिंह अशफ़ाक

 

पिया घर क्यों ना आवै!
हो रामजी!..
पिया घर क्यों ना आवै!
हो रामजी!..

वो तो दूर-दूर जावै!
हो रामजी!..
वो तो दूर दूर जावै!
हो राम जी!..

लंदन भी जावै
वो तो न्यूयॉर्क भी जावै!..
पिया घर क्यों ना आवै!
हो रामजी!..

राजा को खिलावै
वो तो राणी को खिलावै!..
हमने धमकावै!
हो रामजी!..
पिया घर क्यों ना आवै!
हो रामजी!..

सेठ तै खिलावै!
मोटे पेट तै खिलावै!..
हमने हड़कावै!
हो रामजी!..
पिया घर क्यों ना आवै!
हो रामजी!..

चीन भी जावै!
वो तो रूस भी जावै!..
घर तो कदि-कदि आवै!
हो रामजी!..
पिया घर क्यों ना आवै!
हो रामजी!..

 

3 thoughts on “ओमसिंह अशफ़ाक का लोक गीत- पिया घर क्यों ना आवै, हो रामजी!

  1. ओमसिंह अशफ़ाक, कुरुक्षेत्र (हरियाणा) says:

    वरिष्ठ लेखक और अंग्रेजी के आलोचक डॉक्टर एनके नागपाल ने कवि के व्हाट्सएप पर यह टिप्पणी भेजी है। प्रतिबिंब मीडिया के पाठकों के लिए टिप्पणी यहां प्रस्तुत कर रहे हैं :
    “Guess who is piya.
    The poet has said so much in a satirical vein.He is waited much at home. But he is found more at abroad than in his own country.
    “Sir your purpose is fulfilled without naming the piya.”
    -Dr. N k Nagpal formerly principal and professor of English at IGN college, Ladwa (kurukshetra) Haryana, India.

  2. ओमसिंह अशफ़ाक, कुरुक्षेत्र (हरियाणा) says:

    कुरुक्षेत्र के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता श्री बलबीर धामा जी ने कवि के व्हाट्सएप पर एक बहुत संक्षिप्त टिप्पणी भेजी है:
    “Meaningful thought thanks”
    -Balbir Dhama,
    Kurukshetra, Haryana.

  3. ओमसिंह अशफ़ाक, कुरुक्षेत्र (हरियाणा) says:

    वरिष्ठ लेखक कवि एवं नाटककार डा. अमृतलाल मदान की है टिप्पणी कवि के व्हाट्सएप पर प्राप्त हुई है :

    “बड़ा रोचक लोकगीत। काश इसे संगीत बद्ध रूप में प्रस्तुत करते तो सोने पर सुहागा होता।”

    -डा अमृतलाल मदान, प्रोफेसर सेवानिवृत्तर आरकेएसडी कॉलेज, कैथल (हरियाणा)

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