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जयपाल की ‘चलते-चलते’ चार लघु कविताएं 

 चलते-चलते चार लघु कविताएं  जयपाल 1  उसका नाम   स्कूल के दिनों की बात है हड्डियां चमकती थी उसकी कपड़े…

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समकालीन क्रूर-व्यवस्था पर व्यंग्य करती मानवीय संवेदना की पक्षधर कविताएं 

पुस्तक समीक्षा समकालीन क्रूर-व्यवस्था पर व्यंग्य करती मानवीय संवेदना की पक्षधर कविताएं जयपाल की कविताओं का रचनात्मक विश्लेषण मनजीत सिंह…

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समय की शिराओं में धड़कती कविता : जयपाल का काव्य-संसार

पुस्तक समीक्षा समय की शिराओं में धड़कती कविता : जयपाल का काव्य-संसार प्रतिरोध, पुनर्सृजन और मानवीय अस्मिता का विमर्श  …

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जयपाल की चार कविताएं -कामरेडों के अंग-संग

जयपाल की चार कविताएं -कामरेडों के अंग-संग (1) कामरेड की गठरी   ज्ञान की गठरी का पहाड़ जिसे न कभी…

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जयपाल की कविता जिंदगी का सूरज व अन्य तीन कविताएं 

जयपाल की कविता जिंदगी का सूरज व अन्य तीन कविताएं 1 जिंदगी का सूरज   खिलखिलाते खेलते बच्चे हवा, धूप,…