अमेरिका-ईरान युद्ध पर जयपाल की एक कविता- लोकतंत्र की स्थापना

 कविता

लोकतंत्र की स्थापना

जयपाल

 

घेर लो किसी भी देश को

बरसा दो बम

कर दो नेस्तनाबूद

आतंकवादी घोषित कर दो

फहरा दो विजय पताका

सीमाओं को सील कर दो

 

बिजली-पानी काट दो

राशन की सप्लाई बंद कर दो

राहत सामग्री के ट्रक तैयार रखो

राख कर दो हस्पतालों को

आदमी के चिथड़े उड़ा दो

भेज दो एंबुलेंस की गाड़ियां

दवाईयों के जहाज रवाना कर दो

बच्चों पर बम बरसा दो

स्कूलों को मलबे में बदल डालो

शिक्षा के लिए बजट जारी कर दो

बचे खुचे लोगों को कहो

वे भाग जाएं जहां तक भाग सकते हैं

जहां जहां वे जाएं

वहां वहां स्थापित करो शरणार्थी कैंप

विस्थापितों को शरण दो

 

अरे ओ ! दुनिया के महान देशो !

जला डालो इंसानियत का इतिहास

पूंजी का इतिहास रच दो

फोड़ दो सबकी आंखें

काट डालो सबकी जुबां

जड़ दो बंदिशें हवाओं पर

टैंकों पर लोकतंत्र लिख दो

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