Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

जयपाल की दो कविताएँ

जयपाल की दो कविताएँ 1 हम लड़ेंगे तुम्हारे लिए हे ईश्वर! हे ख़ुदा! हम लड़ेंगे तुम्हारे लिए जब तक लड़ने…

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दीपक वोहरा की कविता- तेजतर्रार महबूबा  

 कविता तेजतर्रार महबूबा दीपक वोहरा   दुर्दिन आते नहीं अकेले जैसे गरीबी में आटा गीला गरीबों का दुःख एक खूबसूरत…

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मुनेश त्यागी की कविता – पितृ दिवस के मौके पर

हमारे पिता जी  पढ़े लिखे  नहीं थे। पिता जी के साथ हमारे तीन ताऊजी भी शामिल हैं। हमारे दो ताऊजी…

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शंभुनाथ की कविता – हाथ

कविता हाथ शंभुनाथ   हाथ कंधे पर रखा मनुष्य का विश्वास है जब जुड़ते हैं प्रार्थना बन जाते हैं और…

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मोहन मुक्त की कविता- निगाह…

कविता निगाह… मोहन मुक्त   “मडू लेसा पचु हर…” बचपन के झगड़ों में मेरे साथ के बच्चे किसी बहस में…

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मंजुल भारद्वाज की कविता- बौद्धिक कौम!

कविता बौद्धिक कौम! मंजुल भारद्वाज   भारत की बौद्धिक कौम असहाय है भौंचक यह कौम अधर मैं लटकी है ये…

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होना था इंकलाबी, तू कॉकरोच पार्टी हो गया

कविता होना था इंकलाबी, तू कॉकरोच पार्टी हो गया मुनेश त्यागी बेटी मारी, बहु जलाई औरत को भी रौंद दिया,…

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खंड दो : उत्तर प्रदेश को रो !

जन-कविता का सरोकार है कि उसमें श्रमजीवी जनता के ज्वलंत मुद्दे बोलचाल की भाषा (जन भाषा) में ही वर्णित किए…

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खंड तीन: उड़ीसा दिशाहीन

खंड तीन: उड़ीसा दिशाहीन ओमसिंह अशफ़ाक कविता: उड़ीसा* में आमंत्रित अकाल   कालाहांडी, नौपाड़ा- क्या-बोलांगीर का जिक्र करें ! धरती…

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दो समकालीन ईरानी कविताएँ

दो समकालीन ईरानी कविताएँ 1 रोमांचक सुबह   मोहम्मद बरज़ेगर   दुनिया के पैर दुख-दर्द से भारी हैं निराशाओं का…