जयपाल की दो कविताएँ

जयपाल की दो कविताएँ

1

हम लड़ेंगे तुम्हारे लिए

हे ईश्वर! हे ख़ुदा!

हम लड़ेंगे तुम्हारे लिए

जब तक लड़ने की ताकत बाकी है

हम लड़ेंगे तब तक

जब तक लड़ते-लड़ते मर नहीं जाते

 

ख़ून के आखरी कतरे तक

हम लड़ेंगे उन सबके खिलाफ

जो तुम्हारे खिलाफ होंगे

 

हम उनके सर कलम कर देंगें

जो तुम्हारे सामने सर उठाएँगे

हम अपना भी सर कलम कर लेंगे

अगर तुम्हारा सर न बचा सके

 

हम लड़ते रहेंगे तुम्हारे लिए

जब तक लड़ने की ताकत बाकी है

और

जब तक बाकी है यह दुनिया

 

(अवतार सिंह पाश से क्षमा याचना सहित)

 

2

 ईश्वर और ख़ुदा के नाम

हे ईश्वरों ! हे खुदाओं !

देखो

हमारी तरफ देखो

 

हमारे कंकालों को देखो

पानी नहीं बचा है शरीर में

ना पेट में कोई दाना

हस्पताल में दवा नहीं

स्कूलों में शिक्षा नहीं

करने को काम नहीं

आशियाने उजड़ रहे हैं

काफिले लुट रहे हैं

चारों तरफ हैं

जंगल और खंडहर

विश्वास नहीं बचा है

किसी को किसी पर

युद्ध लड़ा जा रहा है

घर के अंदर और घर के बाहर

सब देशों के इर्दगिर्द

कोई भी नहीं बचा है साबूत कहीं पर

 

अब और क्या चाहिए !

हे ईश्वर! हे खुदा !

बताइए

अब और क्या चाहिए !