Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

ओमसिंह अशफ़ाक की कविता – कहे सबका मालिक भगवान रै बाबा

कविता कहे सबका मालिक भगवान रै बाबा ओमसिंह अशफ़ाक   क्यूं गफ़लत में गल़तान रै बाबा ! इब कड़ै रहे…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

ओमसिंह अशफ़ाक की कविताएं- दृष्टि,ऊर्जा,सीखना और अलाव

ओमसिंह अशफ़ाक की कविताएं- कविता का जन्म, दृष्टि, ऊर्जा, सीखना और अलाव कविता का जन्म   फ़सल सी उगती है…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

ओमसिंह अशफ़ाक की कविता- जाति, धर्म और प्यार-2

कविता जाति, धर्म और प्यार-2 ओमसिंह अशफ़ाक कैसा तो ये राज है, कैसा है कानून । प्रेम तो मंहगा हुआ,…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

ओमसिंह अशफ़ाक की कविता – जात, धर्म और प्यार-1

कविता जात, धर्म और प्यार-1 ओमसिंह अशफ़ाक वैदिक युग में सुण्या करैं थे, देव-असुर संग्राम । नयी सदी ये कैसा…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

ओमसिंह अशफ़ाक का लोक गीत- पिया घर क्यों ना आवै, हो रामजी!

लोक गीत पिया घर क्यों ना आवै, हो रामजी! ओमसिंह अशफ़ाक   पिया घर क्यों ना आवै! हो रामजी!.. पिया…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

ओमसिंह अशफ़ाक की कविता – चलना ही होगा तुम्हें..!

कविता चलना ही होगा तुम्हें..! ओमसिंह अशफ़ाक चलना ही होगा तुम्हें बेशक कठिन है तुम्हारी ये डगर। वहां घात लगाए…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

ओमसिंह अशफ़ाक की कविता- मुल्क की गेल मखौल ना कर !

कविता मुल्क की गेल मखौल ना कर ! ओमसिंह अशफ़ाक दिके दिन-धौली़ तू रौल़ ना कर ! म्हारे मुल्क की…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

ओमसिंह अशफ़ाक की दो कविताएं

ओमसिंह अशफ़ाक की दो कविताएं बाम्बी ऊपर नाग बैठग्या   ना रह्या आपस का प्यार रै बाबा ! बहण-भाई में…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

ओमसिंह अशफ़ाक की कविता – नफ़रत से ना देश चलै रे बंदे !

कविता नफ़रत से ना देश चलै रे बंदे ! ओमसिंह अशफ़ाक अब कैसे तू निकलेगा रे बंदे ! उसने चक्रव्यूह…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

ओमसिंह अशफ़ाक की कविता – जै सनातन! जै सनातन!  दे दनादन! दे दनादन!!

कविता जै सनातन! जै सनातन! दे दनादन! दे दनादन!! ओमसिंह अशफ़ाक 1. सन्तो राष्ट्रवाद की आई आंधी उड़ गए नेहरू, उड़…