ओमसिंह अशफ़ाक की कविता – कहे सबका मालिक भगवान रै बाबा

कविता

कहे सबका मालिक भगवान रै बाबा

ओमसिंह अशफ़ाक

 

क्यूं गफ़लत में गल़तान रै बाबा !
इब कड़ै रहे वो सुल्तान रै बाबा !

वो पाकिस्तान में चला गया, जो
हुया करै था मुल्तान रै बाबा !

इब तू भी निचले सुर में आजा,
या छोड़ दे ऊंची तान रै बाबा !

जै अपणी जिद पैई अड़ा रहा तू,
दिखे हो जागा घमासान रै बाबा !

तनै रोजगार की तो पैड़ मेट दी,
इब कौण भरै नुकसान रै बाबा !

ये मारमुलक के करजे चढ़गे,
इब क्यूकर हो भुगतान रै बाबा !

तू तो झौला़ ठाकै नै भाज पड़ेगा-
कह सबका मालिक भगवान रै बाबा !

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रचना तिथि (31.12.2024)

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