कविता
कहे सबका मालिक भगवान रै बाबा
ओमसिंह अशफ़ाक
क्यूं गफ़लत में गल़तान रै बाबा !
इब कड़ै रहे वो सुल्तान रै बाबा !
वो पाकिस्तान में चला गया, जो
हुया करै था मुल्तान रै बाबा !
इब तू भी निचले सुर में आजा,
या छोड़ दे ऊंची तान रै बाबा !
जै अपणी जिद पैई अड़ा रहा तू,
दिखे हो जागा घमासान रै बाबा !
तनै रोजगार की तो पैड़ मेट दी,
इब कौण भरै नुकसान रै बाबा !
ये मारमुलक के करजे चढ़गे,
इब क्यूकर हो भुगतान रै बाबा !
तू तो झौला़ ठाकै नै भाज पड़ेगा-
कह सबका मालिक भगवान रै बाबा !
————————–
