ओमसिंह अशफ़ाक की कविता – चलना ही होगा तुम्हें..!

कविता

चलना ही होगा तुम्हें..!

ओमसिंह अशफ़ाक

चलना ही होगा तुम्हें बेशक कठिन है तुम्हारी ये डगर।
वहां घात लगाए बैठे हैं राह में कई घड़ियाल और मगर।

हिम्मत अगर छोड़ दी तुमने इस मुश्किल वक्त में।
बर्बाद होना तय है यह तुम्हारा बसा-बसाया नगर।

काफिले तो जुड़ ही जाएंगे कुछ देर से ही सही।
पहल कदमी तो करनी होगी किसी न किसी को मगर।

लिख तो दी है बर्बादी उसने तुम्हारे प्यारे चमन की।
डटना ही होगा मैदान में उसे बचाना चाहते हो अगर।

नहीं होता शॉर्टकट कोई कभी सच्ची कामयाबी का।
मुश्किल तो रहा है चलना हमेशा ही इंसाफ की डगर।

 

2 thoughts on “ओमसिंह अशफ़ाक की कविता – चलना ही होगा तुम्हें..!

  1. ओमसिंह अशफ़ाक, कुरुक्षेत्र (हरियाणा) says:

    अंग्रेजी के लेखक और वरिष्ठ आलोचक डॉ एन के नागपाल की यह टिप्पणी कवि के व्हाट्सएप पर प्राप्त हुई है। हम डॉक्टर नागपाल का धन्यवाद करते हैं और प्रतिबिंब मीडिया के पाठकों की जानकारी के लिए टिप्पणी यहां प्रस्तुत कर रहे हैं:
    “Chalna hi hoga…
    “The path of true success is always full of hardships.If one reaches the top, it is more difficult to maintain the balance. A very balanced minded and a wise person is required to show and lead the path.
    “A very short poem but packed with a great idea.”
    Dr NK Nagpal formerly principal and professor of English at IGN college, Ladwa(kurukshetra) Haryana, India

  2. ओमसिंह अशफ़ाक, कुरुक्षेत्र (हरियाणा) says:

    वरिष्ठ लेखक नाटककार एवं कवि दो अमृतलाल मदन किए टिप्पणी कवि के व्हाट्सएप पर प्राप्त हुई है :

    “एकला भी, पर चलना तो होगा ही।”

    -डा.अमृतलाल मदान, सेवानिवृत्त प्रोफेसर, अंग्रेजी ग्रेजी विभाग, आरकेएसडी कॉलेज कैथल,(हरियाणा)

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