कविता
बस हाथ में हाथ रख …
डॉ रीटा अरोड़ा
कभी किसी के साथ बैठकर
उसकी ख़ामोशी बाँटकर देखिए,
उसकी रूह का सुकून
जानकर देखिए।
आपका न बोलना,
उसके हाथ को हाथ में लेकर बैठना-
उसको कितना सुकून देता है,
कभी महसूस करके देखिए।
उसको यह एहसास देता है-
“कोई है मेरा…”
आपकी मौजूदगी का एहसास
उसके ग़म को भुला देता है।
आपका उसके लिए मौजूद रहना,
बस इतना कहना-
“मैं हूँ ना…”
पल में
उसके सारे दर्द हर लेता है।
कभी किसी को
ऐसा सुकून देकर देखिए…
बिना कुछ कहे
उसके दिल को समझकर देखिए।
