जसवीर त्यागी की कुछ कविताएं

जसवीर त्यागी की कुछ कविताएं

माँ की छवियाँ

माँ की अनेक छवियाँ हैं
अधिकांश छवियों में
वह किसी-न-किसी काम में व्यस्त है

उनमें ज्यादातर
पारिवारिक और सामाजिक व्यस्तताएँ हैं
खुद के लिए व्यस्तताएँ बहुत कम

माँ के पास
फुर्सत और आराम की छवियाँ
न के बराबर हैं।

स्मृति

अब माँ नहीं है
माँ की स्मृति है

अब स्मृति ही
माँ है।

कुछ बातें

 

कुछ बातें
उससे करना चाहता था
कर नहीं पाया

वे अनकही बातें
देर-सबेर
अक्सर मुझसे बातें करती हैं।

दुःख

 

कोई
किसी दूसरे का दुःख
देख सकता है
सुन सकता है

यहाँ तक कि
उसे कह भी सकता है
लेकिन! सह नहीं सकता है।

जीवन-संघर्ष

 

जैसे लंबे रूट की बसें
और मालगाड़ियां
रुख़सत होने से पहले
तेल ईंधन भरती हैं

जीवन-संघर्ष में उतरने से पूर्व
मैं तुम्हें याद करता हूँ।

अनकहा

 

कभी-कभी
उससे कुछ कहना चाहता हूँ
पर कह नहीं पाता

कहने की चाह
और न कह पाने की पीड़ा
मेरे पास छूट जाती है

मैं खुद ही
अनकहे से संवाद करता हूँ

अरमानों के आईने में
खुद को निहारते हुए
उसे याद करता हूँ।

 

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