Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

मंजुल भारद्वाज की कविता – लोक बनो

कविता लोक बनो मंजुल भारद्वाज   जो आपका 10 हज़ार में वोट खरीद कर लोकतंत्र को तबाह कर रहा हो…

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मंजुल भारद्वाज की कविता- कैसी घिनौनी जनता हो तुम

कविता कैसी घिनौनी जनता हो तुम  मंजुल भारद्वाज आज तुमने युवाओं बच्चों के सपने छीन लिए उनके भविष्य को बर्बाद…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – पता नहीं?

कविता पता नहीं? – मंजुल भारद्वाज   खरपतवार सा खप जा घास सा सब जगह पसर जा जानवर चर जायेंगे…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – सफलता कोई मंजिल नहीं,जीवन दृष्टि की यात्रा है!

कविता सफलता कोई मंजिल नहीं,जीवन दृष्टि की यात्रा है! मंजुल भारद्वाज सफलता का क्या अर्थ है गांधी देश को आज़ाद…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – अमलतास

कविता अमलतास मंजुल भारद्वाज हाथ में आते आते यूं फिसल जाती है ज़िंदगी कभी हवा कभी पानी कभी मिट्टी कभी…

Blogआलेख विचारविरासतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

आस्था के अंधकार,उसके पाखंडों को अपने तर्क से ध्वस्त करते हैं कबीर !

आस्था के अंधकार,उसके पाखंडों को अपने तर्क से ध्वस्त करते हैं कबीर ! मंजुल भारद्वाज कबीर भारत में साहित्य का…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – पेड़ चुप नहीं रहते !

कविता पेड़ चुप नहीं रहते ! – मंजुल भारद्वाज   पेड़ चुप नहीं रहते पेड़ बोलते हैं!   जब धूप…

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मंजुल भारद्वाज की कविता- इश्क़ में

कविता इश्क़ में मंजुल भारद्वाज   मैं अपने लिखे पात्रों के इश्क़ में डूबकर कलात्मक बोध के आनंद में झूमता…

Blogकला/कलाकारनाटक रंगमंच थियेटर

दर्शक संवाद तंत्र रंगकर्म का स्वावलंबन है!

रंगमंच दर्शक संवाद तंत्र रंगकर्म का स्वावलंबन है! मंजुल भारद्वाज   पूंजीवाद ने ‘ बेचो और खरीदो’ buy & sell…