मंजुल भारद्वाज की एक कविता

मंजुल भारद्वाज की एक कविता

एक नदी थी
वो महिला हो गई
चारों ओर ….
सब सूख गया !

महिला
फ़िर नदी हो गई
और
सब हरा भरा हो गया !

नदी हो या महिला
प्रवाह उनका होना है
वो जितना प्रवाहित होती हैं
उतना जीवन खूबसूरत होता है!

 

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