मंजुल भारद्वाज की कविता- इश्क़ में

कविता

इश्क़ में

मंजुल भारद्वाज

 

मैं

अपने लिखे पात्रों के

इश्क़ में डूबकर

कलात्मक बोध के

आनंद में झूमता हूं !

 

प्राकृतिक सौंदर्य की

अनुभूति से सराबोर

यथार्थ में

रंगते हुए

नव सृजन के

प्राण फूंकता हूं !

 

रंग चैतन्य के

आलोक में

काल को आकार देते हुए

व्यवहार के

चक्रव्यूह को भेदते हुए

विचार की भट्टी में

काल के परे तराशता हूं !

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