कविता
लोक बनो
मंजुल भारद्वाज
जो आपका 10 हज़ार में वोट खरीद कर
लोकतंत्र को तबाह कर रहा हो
वो आपके बच्चों का ख़्याल रखेगा?
जो आपके चुने हुए प्रतिनिधियों को
आलू मटर की तरह खरीद रहा हो
वो देश को नहीं बेचेगा?
जो सुप्रीम कोर्ट सत्ता की आस्था को
जन आस्था बता संविधान का नाश करता हो
वो आपके बच्चों पर हुए नृशंस हमले की सुनवाई करेगा ?
जो सुप्रीमकोर्ट 7- 8 करोड़ मतदाओं को
मतदान के संवैधानिक अधिकार से वंचित कर दे
वो तुम्हारे बच्चों के भविष्य की रखा करेगा?
तानाशाह कभी लोकलाज का सम्मान करता है?
असल मुद्दा है लोक का खत्म हो जाना
लोक आस्था में अंधा हो गया है!
लाज का असर देखना है तो
लोक बनिए !
लोग कहते हैं गांधी ने क्या किया ?
गांधी ने दमित,शोषित,गुलाम लोगों की
राजनैतिक चेतना जागृत कर
उन्हें लोक बनाया !
संघ ने लोक को आस्था का गुलाम बना
देश को गटर में डूबा दिया !
भारतीयों को हिंदू मुसलमान बना दिया !
गांधी और गोडसे के फ़र्क को समझिए
लोक बनिए !
लोक बनोगे तब तंत्र तुम्हारा होगा
नहीं तो तंत्र हमेशा सत्ता का होता है
हे भारत के लोगों
अपना मानस बदलो
लोक बनो
तानाशाह भाग जायेगा !
