जसवीर त्यागी की अस्पताल केंद्रित कविताएं

जसवीर त्यागी की अस्पताल केंद्रित कविताएं

 

बच्चा और पिता

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बीमारी से ग्रस्त बिस्तर पर लेटा बच्चा
दरवाजे के शीशे से
पिता को अपनी ओर झांकते हुए देखता है
लेटे-लेटे पिता को ‘फ्लाइंग किस’ भेजता है

बच्चे का प्यार
पिता के माथे पर चिपक गया है

एक-दूसरे को निहारते हुए
बच्चा और पिता
किसी पेंटिग में तब्दील गए हैं

बच्चा पिता
और पिता बच्चा हो गए हैं।

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बीमार

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गहन चिकित्सा कक्ष में
बिस्तर पर पड़ा मरीज
पूछता है नर्स से-

‘सिस्टर

अब दिन है
या रात …?

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अनमोल दृश्य

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अस्पताल के बिस्तर पर लेटा रोगी
खिड़की से बाहर का दृश्य देखता है

नीले आसमान में सफेद बादल
हरे पेड़ पर बैठे पँछी
स्कूल वैन से बाहर की ओर ताकते बच्चे

और अपने-अपने काम पर जाते स्त्री-पुरुष

बिस्तर पर पड़े मरीज की निगाह में
ये दुनिया के अनमोल दृश्य हैं।

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मरीज

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अस्पताल से ठीक होकर
घर लौट आया कोरोना मरीज

विस्मयभरी दृष्टि से
निहारता है अपना घर

जैसे कोई राहगीर

किसी रैन बसेरे को देखता है
पहली बार।

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शेर-बेटा

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बारह वर्षीय बच्चे की
सप्ताह में तीन दिन डायलेसिस होती है

बच्चा हर बार
ना-नुकुर करता है

रोग की रस्सी पर चलते हुए बच्चे को
माता-पिता बाहों में भरकर कहते हैं-
यह हमारा शेर बेटा है

बच्चा हौसले से हाथ मिलाता हुआ
माता-पिता को एकटक देखता है

माता-पिता नन्हें शेर को
डॉक्टर और नर्स के साथ जाता हुआ देखते हैं।

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रचना

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बहुत दिनों से
मैंने कोई कविता नहीं लिखी

एक गरीब बच्चे का
पाठशाला में नाम लिखवाया

एक नया पौधा लगाया

अस्पताल में
अनजान रोगियों से मिलकर आया

एक पुस्तक पर
जिल्द बंधवाकर लाया

रूठे हुए एक परिजन को मनाया

कुछ इस तरह
मैंने जीवन काव्यमय बनाया।

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प्रश्न-उत्तर

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एक मित्र की पत्नी
सप्ताह भर से वेंटिलेटर पर हैं
उनकी आठ साल की एक बेटी है
घर में कुल तीन सदस्य

मित्र किसी चमत्कार की आस से
हर रोज अस्पताल जाते हैं
शाम को आँसुओं की नदी पार कर
घर लौटते हैं

आठ बरस की बच्ची
रोज सुबह-शाम
माँ-पिता की स्मृति का पहाड़ा रटती है

पिता और बच्ची
एक-दूसरे के आँसू पोंछते हुए कहते हैं-

माँ जल्दी
घर आयेगी एक दिन।

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बीमार बच्चा

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बीमार बच्चा
दूसरे बच्चों को खेलते हुए देखता है

खेल की एक हुमक
उसके भीतर गेंद-सी उछलती है

बिस्तर पर लेटा बच्चा
खेल नहीं पाता

वह खेल की स्मृतियों संग
छुपम-छुपाई खेलता है

बीमार बच्चा
कुछ इस तरह
खामोशी के संग अपना खेल खेलता है।

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वेंटिलेटर

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एक मित्र की माँ वेंटिलेटर पर हैं
डॉक्टरों का कहना है
दवाएँ असर नहीं कर रहीं
दुआएँ कर सकें
तो दीगर बात है

मुझे आठ साल पहले गयी
अपनी माँ याद आती रही

मैं घण्टा भर मित्र के साथ रहा
उस दौरान
हमारे शब्द
वक़्त के वेंटिलेटर पर थे।

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