अरुणाचल पर क्यों चुप हैं देशभक्ति बेचने वाले?
शीतल पी सिंह
22 अक्तूबर को ITBP प्रमुख ने बताया था कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना और उनके बल के बीच लंबे समय से लगातार skirmishes हो रही हैं। इसके अगली सुबह द हिंदू अखबार ने बताया कि चीनी सेना ने हमारी सीमा के साढ़े छह किलोमीटर अंदर तक आकर अपने टेंट लगा रक्खे हैं। ख़बरें यह भी आईं की दिल्ली में BRICKS की मीटिंग के दौरान भी यह सब जारी था जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत में ही थे।
कल शाम किसी देशभक्त चैनल पर इस मसले पर आपने प्राइम टाइम डिबेट देखी ? एक सोशल एक्टिविस्ट के सिर्फ़ रिजीम चेंज भर कह देने पर लगातार डिबेट चलाते इस मीडिया समूह की देशभक्ति दर असल स्वामिभक्ति है।
यूट्यूब पर भी असंख्य देशभक्ति बेचने वाले योद्धा विद्यमान हैं,उनकी प्रोफ़ाइलों को भी खंगाल आइये, वहां भी इस विषय पर कब्रिस्तान की शांति नज़र आएगी ।
बहुत सी सेनाएं हैं हमारे यहां और उनके असंख्य सेनापति। ये शूरवीर निहत्थे आदिवासी,दलित, अल्पसंख्यक, स्त्रियां और साधारण लोगों के खिलाफ निपट लेने, निपटा देने,ठोंक देने, उनको उनकी भाषा में समझा देने आदि के डिजिटल फतवे दिन में दस बार झाड़ते मिलते हैं, वे भी इस प्रसंग से गायब हैं।
एक दुनियां का सबसे बड़ा unregistered संगठन है जो सीमा पर पहुंचने के लिए सिर्फ़ तीन दिन की मियाद देता घूमता है,वह भी इस मामले में ठीक तीसरे दिन तक गायब है और हम जानते हैं कि अदृश्य ही रहेगा।
उपरोक्त सारी एजेंसियों ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना की कारगुजारियों पर बोलने लिखने वीडियो बनाने और स्टैंड लेने का जिम्मा “देशद्रोहियों” पर सौंप दिया है,यह खबर, विश्लेषण, वीडियो explainer, ट्वीट आदि आपको उन्हीं ठिकानों पर मिलेगा !
