नोबेल नहीं दिया तो पुलित्ज़र ही दे दो?

समसामयिक टिप्पणी

नोबेल नहीं दिया तो पुलित्ज़र ही दे दो?

राजकुमार कुम्भज

 

नोबेल शांति पुरस्कार पाने में अपनी हताशाभरी असफलता के बाद डोनाल्ड ट्रम्प अब पुलित्ज़र पुरस्कार माॅंग रहे हैं?
नोबेल नहीं दिया तो पुलित्ज़र ही दे दो,मगर दे दो?

स्वीडिश नोबेल समिति ने वर्ष 2026 का नोबेल शाॅंति पुरस्कार जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को नहीं दिया,तो अब उन्होंने अमेरिकी पुलित्ज़र पुरस्कार समिति से विनम्र निवेदन किया है कि इस बरस का पुलित्ज़र सम्मान उन्हें दे दिया जाए.उनका आशय बिल्कुल साफ़ और सही है कि नोबेल नहीं दिया,तो पुलित्ज़र ही दे दो.(नहीं दोगे,तो देख लूॅंगा.मेरे पास परमाणु बम हैं )

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बेहद ही बेहूदा बेहूदगी पर उतर आए हैं.पता नहीं कौन-सी अज़ीबोग़रीब मिट्टी से बनी अज़ीबोग़रीब शख़्सियत हैं कि अपमानित होने की हद तक ” पुरस्कार दे दो,पुरस्कार दे दो ” की बाल-सुलभ चेष्टाऍं निरंतर दोहराते रहने पर आमादा हैं.

अभी कुछ ही दिनों पूर्व नोबेल शांति पुरस्कार पाने की ज़िद और भीख का,मनोरंजन-प्रधान प्रहसन दुनिया ने देखा ही है कि संसार के सर्वशक्तिमान देश का सर्वशक्तिमान राष्ट्रपति कैसे लगभग गिड़गिड़ाते हुए धमकीभरे अशोभनीय-ॳंदाज़ में शांति का नोबेल पुरस्कार माॅंग रहा है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इन कथित अवाॅंछित प्रयासों में,ट्रम्प की ऐतिहासिक लाचारी,धमकी,हताशा-निराशा और ख़ीझ इत्यादि बिल्कुल साफ़-साफ़ देखी जाती रही है.उन्होंने स्वीडिश नोबेल समिति को यहाॅं तक धमकाया था कि अगर उन्हें शांति नोबेल पुरस्कार नहीं दिया गया,तो इसके अच्छे परिणाम नहीं होंगे और अब वे एक बार फिर अपने झुॅंझलाहट भरेअंदाज़ में अफ़सोस जताते हुए पुलित्ज़र पुरस्कार झटकना चाहते हैं.

क्या डोनाल्ड ट्रम्प पुलत्ज़िर पुरस्कार को कोई चुटकुला समझ रहे हैं?

क्या वे भूल गए हैं कि प्रतिवर्ष दिया जाने वाला पुलित्ज़र पुरस्कार अमेरिका का एक ऐसा प्रतिष्ठित,सर्वस्वीकृत,सर्वसम्मत पुरस्कार है,जो विशेषतः पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि के लिए दिया जाता है,जिसमें नाटक और सॅंगीत को भी शामिल किया गया है?

पूछा जा सकता है कि डोनाल्ड ट्रम्प ने पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में ऐसा क्या उल्लेखनीय योगदान दिया है कि जिसके लिए वे पुलित्ज़र पुरस्कार की योग्यता दर्ज़ कर रहे हैं?

डोनाल्ड ट्रम्प के नाम से हाल-फ़िलहाल तक जो 19-20 क़िताबें बाज़ार में उपलब्ध हुई हैं,उनमें से अधिकतर बिज़नेस,पाॅलिटिक्स तथा ज़ियो स्ट्रैटेज़ी जैसे विषयों से संदर्भित रही हैं.इनमें से सिर्फ़ एक क़िताब ” द ऑर्ट ऑफ़ द डील ” चर्चित रही है,जो कि आज से लगभग तीस वर्ष पूर्व 1987 में प्रकाशित हुई थी.

क्या पुलित्ज़र पुरस्कार नियमावली में ऐसा कोई नियम उपलब्ध है कि तीस वर्ष पूर्व प्रकाशित क़िताब भी पुरस्कृत की जा सकती है?

पुलित्ज़र पुरस्कार से पहले नोबेल पुरस्कार पाने के लिए भी आत्म-प्रचार करते हुए उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिला,तो इसका नतीज़ा अच्छा नहीं होगा.उन्होंने अपनी दावेदारी के समर्थन में कुल जमा आठ युद्ध रूकवा देने का दावा भी किया था.वे कई बार यह भी दोहरा चुके हैं कि यूक्रेन-रूस युद्ध जल्द ही रूकवा देंगें.

किन्तु जब वर्ष 2026 का नोबेल शाॅंति पुरस्कार,दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल की तमिल न्यायविद और वैश्विक मानवाधिकारों के लिए निरंतर संघर्षरत नवनेथम नावी पिल्लई ( 85) को दे दिया गया,तो युद्धख़ोर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नवनेथम नावी पिल्लई की खिल्ली उड़ाते हुए यहाॅं तक कह दिया था कि दुनिया में नावी पिल्लई को जानता ही कौन है? जबकि नावी पिल्लई,संयुक्त राष्ट्र संघ में मानवाधिकार आयोग की पूर्व उच्चायुक्त होने का गौरव हासिल कर चुकी हैं.फिर डोनाल्ड ट्रम्प नावी पिल्लई के प्रति अपनी असम्मानपूर्ण खीझ ज़ाहिर करते रहे हैं.

कुछ इसी तरह की बेहूदा खीझभरी हरक़त उन्होंने पिछले पुलित्ज़र पुरस्कार के बारे में भी की थी.उनका कहना है कि मुझे पुलित्ज़र पुरस्कार नहीं मिलने का अफ़सोस है,लेकिन अमेरिकी चुनाव में रूसी हस्तक्षेप संदर्भित खोजी पत्रकारिता का पुलित्ज़र पुरस्कार एक ऐसी अवास्तविक-पत्रकार को दे दिया गया,जो इसके लिए सर्वथा नाक़ाबिल थी.

कौन नहीं जानता है कि आज दुनियाभर के देशों में,दुनिया का सर्वाधिक शस्त्र-निर्माता और शस्त्र-विक्रेता देश,अमेरिका है.अपनी इसी शस्त्र-शक्ति के आधार पर वह दुनियाभर का सर्वेसर्वा बना हुआ है.

क्या ऐसा नहीं लगता है कि सर्वशक्तिमान देश के सर्वशक्तिमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प,पुरस्कारों की भीख माॅंगकर,पुरस्कारों की गरिमा और साख का अवमूल्यन कर रहे हैं?

24.10.26

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