जसवीर त्यागी की पांच कविताएं

जसवीर त्यागी की पांच कविताएं

भीगना

बारिश हो रही है
लोग बच रहे हैं बारिश से

डर रहे हैं
भीग न जायें कहीं

भीगना
हर किसी के नसीब में नहीं होता

भीगना मनुष्य होना है।

उदासी

उदासी
तुम मेरे पास क्यों आती हो?

जब मैं तुमसे
कोई नाता नहीं रखना चाहता
फिर भी तुम
मेरे इर्द-गिर्द क्यों घूमती हो?
रह-रहकर मुझसे क्यों सटती हो?

जानता हूँ
तुम शक्तिशाली और प्रभावशाली हो
कहीं भी,किसी पर भी सवार हो सकती हो
कोई तुम्हारा बाल भी बांका नहीं कर सकता

उदासी जाओ
रसूखदारों,मालदारों,और दमदारों को छेड़ो
मुझ मामूली-से कवि को तो छोड़ो।

हाथ

एक हाथ वे हैं
जो मरणासन्न आदमी में
ले आते हैं जीवन
दूसरे वे
जो मासूम निरपराध लोगों की
कर देते हैं निर्मम हत्या

एक हाथ वे हैं
जो चूल्हे में आग फूंकते हैं
दूसरे वे
जो एक ही झटके से
नष्ट कर देते हैं चूल्हे

एक हाथ वे हैं
जो इतिहास के पन्नों पर
लिखते हैं जीवन की कविता
दूसरे वे
जो इतिहास को
फेंक देते हैं समंदर में

दुनिया में दो तरह के हाथ हैं
एक वे जो निर्माण करते हैं
और दूसरे वे जो विनाश करते हैं

अपने दिल पर रखकर हाथ
सच-सच बताइये
आप
किस तरह के हाथ रखते हैं ?

मोची

ठसाठस भरी बसें
चमचमाती कारें
और चीखते-चिल्लाते स्कूटर
रोज निकलते हैं
उसकी आँखों के सामने से

लेकिन!चौदह-पन्द्रह साल का
वह सांवला लड़का
गर्दन झुकाये
चिपका रहता है किसी जूते पर

उसकी तल्लीनता देखकर
लगता है वह दुनिया का
सबसे व्यस्त मोची है

जिसे…

आतुर

नये योद्धाओं में
जिज्ञासाओं और सपनों का समंदर
पछाड़ मारता है

वे तुरंत-तत्काल
कुछ कालजयी करना चाहते हैं
इसके लिए
हर तरह के सफल-असफल प्रयास करते हैं

यह दुनिया महाभारत है
जहाँ हर पात्र घटना और समय
एक-दूसरे का इंतजार कर रहे हैं

भीष्म,द्रोण,दुर्योधन
कर्ण,अर्जुन अश्वथामा,शकुनि सरीखे महाबली
एक-दूसरे पर आँख गड़ाए हैं

और धृतराष्ट्र भीम को
बाहों में भरने को आतुर हैं।

जसवीर त्यागी दिल्ली विश्वविद्यालय के राजधानी कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर हैं।

 

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