Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसमय /समाज

राजेश भारती की एक कविता – संसद भवन की कैन्टीन

संसद भवन की कैन्टीन में बैठे हुए एक नेता ने कहा: देश खतरे में है दूसरे ने जवाब दिया: नहीं,…

Blogआलेख विचारआलोचना/ लेखसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

अशोक वाजपेयी के बहाने साहित्य के नए सवाल- एक अंश-

अशोक वाजपेयी के बहाने साहित्य के नए सवाल- एक अंश जगदीश्वर चतुर्वेदी   इस समय हिन्दी के सत्ताधारी प्रगतिशील-कलावादी लेखक…

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मुनेश त्यागी की कविता – अच्छे बुरे “वादों” से भरपूर दुनिया

 कविता अच्छे बुरे “वादों” से भरपूर दुनिया मुनेश त्यागी   जातिवाद, क्षेत्रवाद, धर्मवाद से बचाओ पूरे के पूरे समाज को,…

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डॉ रीटा अरोड़ा की लघुकथा – साथ चलना है

लघु कथा साथ चलना है डॉ रीटा अरोड़ा   “आजकल तुम्हारी बातें बदल गई हैं,” पति ने कहा। पत्नी ने…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – स्त्री का मौन

कविता स्त्री का मौन – मंजुल भारद्वाज   क्या है स्त्री का मौन ? बेबसी,लाचारी,परित्याग मज़बूरी,ग़रीबी,ग्लानि आत्महीनता,आत्म विफलता गुलामी,पराधीनता,समर्पण अर्पण,स्वछंदता,पूर्णता…

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डॉ. रीटा अरोड़ा की लघु कथा – परखना मत

लघु कथा परखना मत डॉ. रीटा अरोड़ा   “भैया, माँ के जन्मदिन पर गाँव चलोगे?” “देखेंगे।” “फिर वही?” “काम है।”…

Blogगीत ग़ज़लसमय/समाजहरियाणा

रणबीर सिंह दहिया की रागनी – या बढ़गी बेरोजगरी, यो करजा चढ़ग्या भारी

रणबीर सिंह दहिया की रागनी – या बढ़गी बेरोजगरी, यो करजा चढ़ग्या भारी या बढ़गी बेरोजगरी, यो करजा चढ़ग्या भारी,…

Blogगीत ग़ज़लसाहित्य/पुस्तक समीक्षाहरियाणा

रणबीर सिंह दहिया की रागनी – के बुझेगी भाण मेरी मैं के के बात बताऊं

रागनी के बुझेगी भाण मेरी मैं के के बात बताऊं रणबीर सिंह दहिया के बुझेगी भाण मेरी मैं के के…

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नरसिंह कुमार मयूर की कविता – जाग उठो, आवाज़ दो!

कविता जाग उठो, आवाज़ दो! नरसिंह कुमार मयूर   जाग उठो, आवाज़ दो! बदलाव की आस और हमारी ज़िम्मेदारी; हम…