कविता
राह खाक की हमने छानी तब जाकर के प्यार मिला है
डाॅ कपिल भारद्वाज
राह खाक की हमने छानी तब जाकर के प्यार मिला है
अहसासों की बलिवेदी पर
राहों की आड़ी टेढ़ी पर
जब जब हमने कदम धरा
दिल को दर्द अपार मिला है
राह खाक की हमने छानी तब जाकर के प्यार मिला है
तम्बूरे में गीत जले हैं
नयनों में बस रात बले हैं
चीख चीख के आंधी नापी तब जाके संसार मिला है
राह खाक की हमने छानी तब जाकर के प्यार मिला है
सूखे पत्तों से चर चर कांपे
सहरा दरिया सागर नापे
बड़े जतनों से मंजिल पाई, सोने सा घरबार मिला है
राह खाक की हमने छानी तब जाकर के प्यार मिला है !
