ओमसिंह अशफ़ाक की दो कविताएं

ओमसिंह अशफ़ाक की दो कविताएं

तानाशाही दस्तूर ना कर!

 

सत्ता का इतना गुरूर ना कर!
हमें मरने पर मजबूर ना कर !

तेरी रूह को चैन मिलेगा कैसे,
तू नज़र को इतना क्रूर ना कर!

नायक था तू सब जनता का,
म्हारे साथ दुभांति हुजूर ना कर!

लोकतंत्र तो है प्राण देश का,
तू तानाशाही दस्तूर ना कर!

तुझे करना है जो सब कुछ कर,
पर देश की रूह में नासूर ना कर!

दिन में कर चाहे रात में कर,
पर गरिमा चकनाचूर ना कर !
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पोल खुलती है जरूर एक दिन

 

होता है जो फोकट में मशहूर, एक दिन!
पोल ढोल की खुलती है, जरूर एक दिन!

ख़तम जल्दी होवेगा यो नाटक भी, जरूर एक दिन!
थारे ई सिर पै बाज्जैगा यो मुस्सल़ भी, जरूर एक दिन!

साथ म्हारे बड़ा धोखा होया सच ये बोलना, जरूर एक दिन!
हिम्मत करके भेद सारा खोलना, जरूर एक दिन!

सौ दिन पाच्छै आया करै साध का, जरूर एक दिन!
फेर फुरसत में निका़लियो हिसाब का, जरूर एक दिन!

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