फादर स्टैन स्वामी सामाजिक कार्यकर्ता थे। वह गरीबों आदिवासियों का जीवन बेहतर बनाने के लिए काम करते थे, उनको अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष करते थे।। भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में उनको आरोपी बनाया गया था। 5 जुलाई 2021 को न्यायिक हिरासत में इलाज के दौरान अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई । 84 साल के फादर स्टैन स्वामी ने जेल में अपनी मृत्यु से पहले यह कविता लिखी थी -संपादक
फादर स्टैन स्वामी की कविता
विशाल और भयावह जेल के फाटक के भीतर
सारी वस्तुएँ मुझसे ले ली गईं,
केवल जीवन की न्यूनतम आवश्यकताएँ बचीं।
“तुम” पहले आते हो,
“मैं” बाद में।
“हम” वह हवा है जिसे हम साँसों में भरते हैं।
कुछ भी मेरा नहीं,
कुछ भी तुम्हारा नहीं,
सब कुछ हमारा है।
बचा हुआ भोजन फेंका नहीं जाता,
सब कुछ आकाश के पक्षियों के साथ बाँटा जाता है।
वे उड़कर भीतर आते हैं,
पेट भरकर खाते हैं,
और प्रसन्न होकर उड़ जाते हैं।
इतने सारे युवा चेहरे देखकर दुःख हुआ।
मैंने पूछा— “तुम यहाँ क्यों हो?”
उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के सब कुछ बता दिया।
हर व्यक्ति से उसकी क्षमता के अनुसार,
हर व्यक्ति को उसकी आवश्यकता के अनुसार—
यही तो समाजवाद है।
लेकिन अफ़सोस, यह साझापन यहाँ मजबूरी से पैदा हुआ है।
काश, सभी मनुष्य इसे स्वेच्छा और खुशी से अपनाएँ,
तब सचमुच सभी धरती माँ की संतान बन जाएँगे।
