भगवत रावत की बेटी के नाम: शोक-पत्र 

भगवत रावत की बेटी के नाम : शोक-पत्र

ओमसिंह अशफ़ाक

 

प्रिय बेटी प्रज्ञा,

हमारे अज़ीज़ और बड़े कवि आपके पिता श्री भगवत रावत जी नहीं रहे- यह बात मुझे गत सात तारीख को ही पता चल पायी है। वह भी साप्ताहिक ‘लोक लहर’ के एक शोक-संदेश को पढ़ कर ही जान सका हूं।

पता नहीं इधर प्रेस और टीवी चैनलों पर यह दुखद समाचार नहीं आया या फिर मेरी नजर की चूक अथवा लापरवाही रही।

बहुत बड़ा आघात लगा और तभी मैंने उनके निवास पर आप लोगों से फोन मिलाया था।

मुझे अफसोस है कि मैं आपके परिवार को हिम्मत देने के बजाय स्वयं भावुक हो गया था। इस हद तक कि कुछ देर तक संवाद भी कायम न हो सका?

इस कमजोर व्यवहार के लिए मैं खुद शर्मिंदा हूं और आपकी बड़ी बहन तथा पूरे परिवार से इस लापरवाही के लिए क्षमाप्रार्थी हूं कि माहौल को संयत बनाने के बजाय, मैंने और शोकग्रस्त कर दिया होगा।

भगवत रावत साहब मुझसे करीब 10 साल बड़े थे। 6-7 साल पहले (अवधि में चूक हो सकती है) प्रो. कमला प्रसाद और प्रो. भगवत रावत जी विकास नारायण राय के साथ कुरुक्षेत्र आए थे, तब उनसे मेरी पहली मुलाकात हुई थी।

उसके बाद एक बार करनाल और मधुबन में भी मिलना हुआ था। कुरुक्षेत्र आगमन पर मैंने उन दोनों को अपना कविता और कहानी संग्रह भी भेंट किया था और तभी से मैं उनकी कविता के संपर्क में आया, क्योंकि विकास जी ने उनकी निर्वाचित कविताएं प्रकाशित करवा दी थीं और हमने तुरंत पुस्तक खरीद कर सभी कविताएं पढ़ डाली थीं।

तब से पूर्व हमारी सीमित जानकारी के चलते उनकी कविताओं से परिचय न के बराबर ही रहा होगा। हां, विकास जी उन्हें आई.पी.एस. में आने से पहले से ही जानते थे और उनकी कविता के खास मुरीद रहे थे, जैसा कि एक प्रसंग में उन्होंने अपनी बातचीत में बताया था।

हुआ यूं कि विकास राय की ‘यू.पी.एस.सी. की परीक्षा में किसी फॉर्म में शौक (हॉबी) बारे पूछा गया था- “उसमें मैंने ‘कविता पढ़ना’ लिख दिया था। बहरहाल इंटरव्यू के समय जब उन्होंने मेरी हॉबी वाला कॉलम देखा और पसंदीदा ‘कवि का नाम’ पूछा तो मैंने भगवत रावत बताया।..

इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य स्वयं भगवत रावत के कवि से और उनकी कविता से परिचित नहीं थे? इसलिए मैं जो भी उनकी कविता के बारे में जानता था, बताता रहा और वे सुनते रहे। उनके पास असहमत होने या मुझे गलत साबित करने का कोई अवसर ही नहीं था! और मुझे इस स्थिति का बहुत फायदा रहा और मैं इंटरव्यू में पास हो गया।” खैर, यह तो अवांतर प्रसंग हो गया है..।

बहरहाल तुमसे बात करके इस सूचना से मन को थोड़ी राहत जरूर मिली कि तुम सब बहन-भाई अच्छे-से सेटल हो और तुम्हें कविता का न केवल शौक है, बल्कि इस क्षेत्र में अच्छा दखल भी रखती हो और रावत जी की साहित्यिक विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने में सक्षम हो।

आपकी माताजी से उस दिन फोन पर तो बात नहीं हो सकी, परंतु भगवत जी की कविताओं में हमने उनका काफी परिचय हासिल कर लिया है और यह भी जान लिया है कि वह उनकी कितनी सहज-संभाल करती थीं।

भगवत जी भी उन्हें बेहद प्रेम करते थे। उनके लगाव और परिश्रम को उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से कविता में खूब रेखांकित भी किया है! अब उनकी देखभाल की जिम्मेदारी आप सब भाई-बहनों को उसी शिद्दत से करनी चाहिए।

भगवत रावत जी ने सार्थक जीवन जिया और खूब साहित्य सृजन किया, जो आने वाली पीढ़ियों के काम आता रहेगा और इस तरह वे हमेशा हमारे बीच बने रहेंगे और प्रेरित करते रहेंगे।

फिर भी सेहत की जिस अवस्था में हमने उन्हें देखा था, उससे यह बिल्कुल नहीं लगता था कि वे हमें इतनी जल्दी छोड़कर चले जाएंगे?

यथाशीघ्र शोक से निकलना होगा और उनके काम को आगे बढ़ाना होगा, क्योंकि अब वे नहीं हैं, इसलिए यह दायित्व आपके परिवार और भगवत जी के साहित्यिक मित्रों-शुभचिंतकों पर आ गया है। हम उम्मीद करते हैं कि वे सब मिलकर इस दायित्व को बखूबी पूरा करेंगे..!

अशफाक

12.6.2.12

 

सुश्री प्रज्ञा रावत,

सुपुत्री स्व. भगवत रावत जी,

129, अराधना नगर, भोपाल

मध्य प्रदेश।

2 thoughts on “भगवत रावत की बेटी के नाम: शोक-पत्र 

  1. “The condolence message written by you is not less than a literary piece.
    Badhai.”
    -Dr. NK Nagpal,
    Principal (Rtd.)
    IGN College,Ladwa( kkr)

  2. You are a prolific writer..
    I read your poems with much interest.”

    Dr Sunita Pathania,
    Formerly professor,
    Department of modern history,
    Kurukshetra University, kurukshetra.

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