Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

मंजुल भारद्वाज की कविता – समय से परे

कविता समय से परे – मंजुल भारद्वाज   समय से परे क्या है? शून्य में घूमते अंतराल के सिवा! आत्म…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – जब जब धर्म…

कविता जब जब धर्म … – मंजुल भारद्वाज जब जब धर्म समाज में उफनता है मुफ़्लिसी की ज़िंदगी ख़ैरात की…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – स्त्री का मौन

कविता स्त्री का मौन – मंजुल भारद्वाज   क्या है स्त्री का मौन ? बेबसी,लाचारी,परित्याग मज़बूरी,ग़रीबी,ग्लानि आत्महीनता,आत्म विफलता गुलामी,पराधीनता,समर्पण अर्पण,स्वछंदता,पूर्णता…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – सूत्रपात (Inception)

कविता सूत्रपात (Inception) – मंजुल भारद्वाज 1980 के दशक की तस्वीरों की बाढ़ में डूब गया है सोशल मीडिया… क्रांति…

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भारत में आज शिक्षक होते तो?

भारत में आज शिक्षक होते तो? – मंजुल भारद्वाज   प्रेम, भाईचारा, सौहार्द किताबों में न सिसकते संविधान में दिए…

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मंजुल भारद्वाज की कविताएं

मंजुल भारद्वाज की कविताएं हे पुरुष ! हे मूंछों पर ताव देने से पहले सोचो तुम कौन हो? तुम्हारे पास…

Blogविज्ञान / तकनीकशिक्षासमय/समाजसामाजिक/ सांस्कृतिक रिपोर्ट

विज्ञान सत्य है जो धर्म और ईश्वर मुक्त है !

विज्ञान सत्य है जो धर्म और ईश्वर मुक्त है ! – मंजुल भारद्वाज सत्य ही विज्ञान है.सत्य एक निरंतर खोज…

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मंजुल भारद्वाज की कविता- जीवन कहीं खो गया है

कविता जीवन कहीं खो गया है मंजुल भारद्वाज   जीवन कहीं खो गया है खिल रहा था जो तेरी रानाइयों…