भारत में आज शिक्षक होते तो?

भारत में आज शिक्षक होते तो?

– मंजुल भारद्वाज

 

प्रेम, भाईचारा, सौहार्द

किताबों में न सिसकते

संविधान में दिए मौलिक अधिकार

कागज़ी नहीं होते

सरकार ने शिक्षा का

निजीकरण नहीं किया होता

आज सबके सामने देश

ऐसे न बिकता !

 

नागरिक ग्राहक नहीं बनता

भारतीय होने से ज्यादा

हिंदू-मुसलमान होना

गर्व की बात नहीं होता

हुक्मरान, जलते दीयों को बुझा

सब जगह अंधेरा नहीं फैलाता!

 

अंधेरे में हिंसक भीड़

ताली, थाली नहीं बजाती

सत्य को कुचल

झूठ का परचम

नहीं लहराता !

 

आज भारत में

शिक्षक होते तो

भारत में अमृतकाल

मृत्युकाल नहीं होता !

One thought on “भारत में आज शिक्षक होते तो?”

  1. पिछले दिनों एक सेमिनार में श्रोता बनने का मौका मिला। बड़े-बड़े शिक्षाशास्त्रियों और विद्वतजनों ने अपने विचार रखे। घंटों मंथन के बाद मैंने लब्बोलुआब यही निकाला कि शिक्षण संस्थानों में अच्छे शिक्षक नहीं है। खासतौर से सरकारी। बिना किसी से कोई सवाल किए तभी से मैं लगातार इस मंथन में हूं कि अध्यापक बनने के लिए सरकारी स्तर पर सर्वोत्तम शिक्षा और प्रशिक्षण प्राप्त ये शिक्षक सारी अर्हताओं को पार करने के बाद ही चयनित होते हैं। फिर अच्छे क्यों नहीं होते। मेरी इस उलझन को यदि कोई दूर कर सके तो इस ज्ञानवर्धन के लिए आभारी रहूंगा।

Comments are closed.

1