मंजुल भारद्वाज की कविता – जब जब धर्म…

कविता

जब जब धर्म …

– मंजुल भारद्वाज

जब जब धर्म
समाज में उफनता है
मुफ़्लिसी की ज़िंदगी
ख़ैरात की सौग़ात लाता है!

जब जब धर्म
जीवन में उतरता है
भेदभाव,अस्पृश्यता,ग़ैर बराबरी
महिलाओं को दोयम बनाता है!

जब जब धर्म
दिलों में पसरता है
नफ़रत,द्वेष,हिंसा के रथ पर
धर्मांध सत्ता की फ़सल उगाता है!

जब जब धर्म
सड़क पर उतरता है
इंसानियत का क़त्ल
सड़कें लहूलुहान करता है!

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