रणबीर सिंह दहिया की रागनी- अठहत्तर बरस की आजादी

रणबीर सिंह दहिया की रागनी- अठहत्तर बरस की आजादी

अठहत्तर बरस की आजादी
अठहत्तर बरस की आजादी मैं लोगों के खोया के पाया।।
बनाई ईमारत चालीस मंजली पर खुले मैं बिस्तर लाया ।।

1

आजादी का सपना म्हारा सबनै रोजगार मिलैगा फेर
आजादी का सपना म्हारा सबनै घरबार मिलैगा फेर
आजादी का सपना म्हारा सबनै उपचार मिलैगा फेर
आजादी का सपना म्हारा सबनै संस्कार मिलैगा फेर
सारे भारतवासी शिक्षित होज्याँ मिलके अलख जगाया।।

2

किसान मजदूर खुभात करी खेतों मैं खूब कमाये दोनों
माट्टी गेल्याँ माट्टी होगे मुड़ कै नै नहीं लखाए दोनों
बड़े बड़े शहर बसाये विकास की रीढ़ कहाए दोनों
तीसरी शक्ती बनैगा भारत बैठे सैं आस लगाये दोनों
जमींदार और अमीर किसान नै सबतैं ज्यादा फायदा ठाया ।।

3

टाटा बिड़ला करोड़ पति थे दौलत का आज औड़ नहीं
अम्बानी के महल का पूरे भारत देश मैं कोए तौड़ नहीं
अमीर होगे अमीर कसूते गरीबाँ नै ठिकाना ठौड़ नहीं
काले धन का राम हिम्मती होण देता भांडा फौड़ नहीं
अन्ना हजारे गुम होगे राम देव की झलकै सै इबै माया।।

4

सपना पूरा हुया नहीं सै किसान मजदूर कमेरे का
जात पांत पै बाँट कसूते माहौल बना दिया अँधेरे का
म्हारी बाँट नै मजबूत करया यो लूट का जाल लूटेरे का
रणबीर सिंह बरोने आला समझै सै खेल बघेरे का
किसान मजदूर के एके बिना सपना पूरा ना हो पाया।।

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