HomeBlogसुरेंद्र कल्याण बुटाना की कविता – मैं सुरेंद्र कल्याण बुटाना की कविता – मैं 4 October 20265 October 2026Pratibimb Media कविता ‘मैं’ सुरेंद्र कल्याण बुटाना मैं सो रहा हूँ या जाग रहा हूँ निन्द्रा में भी – हाय मैं कितना अभागा हूँ यहाँ तो सब मेरे – मन का था। फिर भी न हो सका पूरा आज भी मैं आधा हूँ। Post Views: 22 Like 0 0 Comments
आगे अशांति हैः ट्रम्पियन दुनिया में उदार लोकतंत्र टिमोथी गार्टन ऐश जब संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ग्रीनलैंड, पनामा और कनाडा पर नज़र डालते हैं, जैसे…
बानू मुश्ताक़ की कहानी- ‘अंगार का मेंह’ बुकर पुरस्कार से सम्मानित कहानीकार बानो मुश्ताक़ की कहानी ‘फ़ायर रेन’ (हिंदी में ‘अंगार का मेंह’) पैतृक संपत्ति में बहनों…
शुभेंदु अधिकारी चाहते हैं कि उन्हें समझा जाए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव राजा और वज़ीर की गपशप शुभेंदु अधिकारी, उम्र: 55 शुभेंदु अधिकारी चाहते हैं कि उन्हें समझा…