मां की मुहावरेदार भाषा ने बनाया कविः भारत भूषण
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प्रलेस अंबाला ने ‘मिलिए अपने लेखक से’ संगोष्ठी का किया आयोजन
प्रगतिशील लेखक संघ की अंबाला इकाई द्वारा मासिक संगोष्ठी “मिलिए अपने लेखक से” के आयोजित की गई। प्रगतिशील लेखक संघ हरियाणा के वित्तसचिव प्रो गुरदेव सिंह देव ने कार्यक्रम का संचालन किया । मरहूम साहित्यकारों को समर्पित प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष तनवीर जाफरी ने की। मुख्यवक्ता अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य वरिष्ठ कवि डॉ रत्न सिंह ढिल्लों ने प्रगतिशील लहर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं वर्तमान स्थिति की जानकारी दी तथा हरियाणा में इस लहर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण
भूमिका निभाने वाले मरहूम साहित्यकारों हरिभजन सिंह कोमल, ललित कार्तिकेय, ब्रह्मकुमार सिंह, महिंदर सिंह नागी, हरभजन सिंह रेणु, पूर्ण मुदगिल,डा सुभाष मानसा एवं पत्रकार रामचन्द्र छत्रपति आदि के संघर्ष व योगदान की विशेष चर्चा की।
दूसरे सत्र में पंजाबी कविता की 18 पुस्तकों रचयिता 76 वर्षीय वरिष्ठ कवि भारत भूषण से संवाद रचाया ।
1947 में पश्चिमी पंजाब से आए पूर्वजों की बोली व नारोवाल की मिट्टी महक उनकी कविताओं में रची बसी है। उन्होंने बताया कि ठेठ मुहावरेदार भाषा अपनी माँ से सीखी है जिसने उन्हें कवि बनाया। जन्म बटाला में हुआ और बचपन डेरा बाबा नानक में बीता। काव्य सृजन में पटियाला के डॉ जोगा सिंह भाषा विभाग, पंजाब के नवीन व सतनाम सिंह आदि के मशवरे मिलते रहे। उन्होंने अपनी पसंदीदा रचनाएँ रावी, कोई पिंड मेरा वी, जे वग्गण रावीते झनां, व धीयाँ नूहाँ सुनाईं और श्रोताओं के सवालों के जवाब दिए। बानगी देखें – ‘असीं सोचां विच खुब्ब गए। किन्ने ही सूरज डुब्ब गए’।
संगोष्ठी के तृतीय सत्र, जिसकी अध्यक्षता तर्कपथ पत्रिका के संपादक गुरमीत तर्कशील ने की। इस मौके पर कवियों ने अपनी रचनाएँ सुनाईं । रंगकर्मी कवि यादविंदर सिंह कलौली ने ‘मै कँडियाली तार वे’ कृष्ण अवतार सूरी ने, ‘ एह दुनिया रंग बिरंगी है’, तनवीर जाफ़री ने हास्य व्यंग्य तथा नरसिंह कुमार मयूर ने श्रद्धालुओं की श्रद्धा पर रोचक व्यंग्य रचना प्रस्तुत की। अन्य कवियों भारत भूषण, रतन सिंह ढिल्लों, गुरदेव सिंह देव ने भी कविताएँ सुनाईं । गुरमीत तर्कशील ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कार्यक्रम पर विशेष टिप्पणी करते हुए सराहना की । संयोजक प्रो. देव ने श्रोताओं परमजीत सिंह, भगवंत सिंह भानूं व कृष्ण गुप्ता का विशेष आभार व्यक्त किया ।
