जयपाल की कविता–पाखण्डी

कविता

पाखण्डी

जयपाल

 

वे आर्थिक सुधार करेंगे

मरने को मजबूर कर देंगे

रोजगार की बात करेंगे

रोटी छीन लेंगे

 

वे हमें पेप्सी पिलाएँगे

पानी से प्यासे मार देंगे

वे मंदिर बनवाएंगे

बस्तियाँ उजाड़ देंगे

वे शिक्षा में सुधार करेंगे

शिक्षा को व्यापार बना देंगे

 

शान्ति की अपील करेंगे

जंग का एलान कर देंगे

वे सुरक्षा की बात करेंगे

शहरों पर बम बरसा देंगे

जनतंत्र के गीत गाएंगे

तानाशाही स्थापित कर देंगे

 

इस तरह

वे हमारेआंसू पोंछेंगे

और

दृष्टि छीन देंगे

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