जिन लोगों को मेरी सुरक्षा करनी चाहिए थी, उस दिन मैं उन्हीं लोगों से पिट रही हूं” 

यह ऐसी कंट्री है, to be very honest

जिन लोगों को मेरी सुरक्षा करनी चाहिए थी, उस दिन मैं उन्हीं लोगों से पिट रही हूं”

नीलेश जैन

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Gen Z को सलाम! भयंकर ट्रोलिंग और भद्दी- भद्दी गालियां खाने के बावजूद यह पीढ़ी पुलिस बलों की जंतर मंतर करतूतों को निर्भीकता से लगातार उजागर कर रही है।

Gen Z की निर्भीकता का एक उदाहरण 5 अगस्त को राहुल गांधी की दिल्ली प्रेस कान्फ्रन्स में देखने को मिला जहां पाँच आंदोलनकारी युवाओं न मोदी सरकार के अलोकतांत्रिक चाल-चलन का मुखर विरोध किया और अंधभक्तों की भद्दी ट्रोलिंग की दास्तां सुनाई। इन युवाओं में से एक थी मुस्कान शर्मा (संलग्न फोटो)।

प्रेस कान्फ्रन्स में जब मुस्कान पुलिस बलों की जंतर मंतर क्रूरता बयां कर रही थी तब एक संवाददाता ने पूछा, “आप सब लोगों से सवाल है कि आप कह रहे हो इन्टिमिडैट किया जा रहा है, आपको डराया जा रहा है, आप पर एक्शन हो रहा है। Even then you are standing here. What makes you stand here?”

मुस्कान से पहले राहुल ने इस सवाल पर यह प्रतिक्रिया दी, “मैं कुछ और कहना चाहता हूँ जो (इन बच्चियों का) और ज़्यादा शक्तिशाली (व्यवहार दर्शाता) है । ये युवा लोग यहाँ भारत की प्रेस के सामने खड़े हैं। लेकिन अमित शाह और प्रधानमंत्री में यहाँ (प्रेस के सामने) खड़े होने का साहस नहीं है।“

राहुल की प्रतिक्रिया के बाद मुस्कान कहती हैं, “अगर ये (प्रेस कान्फ्रन्स वार्तालाप) बाहर जाएगा तो उसके बाद हमें रोज और गालियां पड़ने वाली है। कल को मेरे साथ गलत होगा तो मेरे साथ कोई खड़ा नहीं होगा अगर आज मैं दूसरों के लिए आवाज नहीं उठाऊंगी। यह ऐसी कंट्री है, to be very honest, जिन लोगों को मेरी सुरक्षा करनी चाहिए थी, उस दिन मैं उन्हीं लोगों से पिट रही हूं। So as a woman of this country, please tell me where I am supposed to go for my protection। मुझे बस आप इतना बता दीजिए।“

पत्रकार के सवाल पूछने से पहले मुस्कान ने अपनी जंतर मंतर दास्तां सुनाते हुए कुछ सवाल किए थे:

“…जब मैं (जंतर मंतर प्रदर्शन में) शांति से चल रही थी तो… RAF अफसरों ने मेरे ऊपर लाठी क्यों बजाई? जब यह स्पष्ट रूल है कि आप जांघ के ऊपर नहीं मार सकते हो और एक पुरुष ऑफिसर किसी लड़की को नहीं मार सकता, तो एक पुरुष RAF अफसर ने मेरे नितंब पर डंडा मारने की कोशिश क्यों की?… ऐसा करने के लिए जिसने भी आर्डर दिया था, अगर वो आ कर मुझसे माफी मांग ले तो मुझे भी बहुत खुशी होगी।“

बेशक मुस्कान ने अपनी बाते बेखौफ कही परंतु उसके सामने मोदी की “नया भारत संस्कृति” के अनुरूप अपने धर्म पर स्पष्टीकरण देने की मजबूरी भी थी। कारण: उसका नाम मुस्लिम प्रतीत होता है। वह यह स्पष्टीकरण देती है, “मैं यह भी add करना चाहूंगी कि मेरा सरनेम शर्मा है। यह मैं इसीलिए बता रही हूं क्योंकि आजकल हर कोई मान के बैठा है कि मैं मुस्लिम हूं और इसीलिए मुझे और ज्यादा गालियां मिल रही हैं। And that doesn’t tell anything about me, but tells a lot about the narrative जो इस कन्ट्री में अभी सेट हो रहा है – अगर इसने सरकार के खिलाफ बोल दिया तो यह तो मुस्लिम है। और जैसे ही आप किसी को मुस्लिम बना देते हो वो somehow अपने आप ही एंटी नेशनल कैसे बन रहा है। हम इस नैरेटिव को बहुत ज्यादा आजकल फॉलो कर रहे हैं…”

 

नीलेश जैन की फेसबुक वॉल से साभार

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