हर मोड़ का अर्थ उसी मोड़ पर समझ में आए आवश्यक नहीं

युवाओं, अब यह स्वतंत्रता की मशाल तुम्हारे हाथों में है। इसे केवल संभालना नहीं, और अधिक उज्ज्वल बनाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां गर्व से कह सकें - “हमारे पूर्वजों ने हमें आज़ादी दी थी, और हमने उस आज़ादी को सम्मान, एकता और कर्म से जीवित रखा।”

हर मोड़ का अर्थ उसी मोड़ पर समझ में आए आवश्यक नहीं

  • जिसे हम दुर्भाग्य समझकर रोते हैं, कई बार वही अनदेखा मोड़ हमें किसी बड़े संकट से बचाकर बेहतर मंज़िल तक पहुँचा रहा होता है

 

डॉ. रीटा अरोड़ा

 

“माँ, मेरी ट्रेन छूट गई… आज तो मेरा पूरा दिन खराब हो गया!” बेटे ने झुँझलाते हुए फोन पर कहा।
माँ ने शांत स्वर में जवाब दिया, “बेटा, अगली ट्रेन पकड़ लेना। हर छूटी हुई चीज़ नुकसान ही हो, यह ज़रूरी नहीं।”
बेटा नाराज़ होकर बोला, “माँ, आप भी न! हर बात में अच्छाई ढूँढ़ लेती हैं।”
कुछ घंटों बाद खबर आई कि उसी ट्रेन के मार्ग पर बड़ा हादसा हो गया था। बेटा कुछ देर फोन हाथ में लिए चुप बैठा रहा। फिर माँ को फोन किया और केवल इतना कहा-
“माँ… आज पहली बार समझ आया, कभी-कभी देर होना भी समय पर होना होता है।”

जीवन में हम सभी ने ऐसे क्षण देखे हैं जब हमारी बनाई हुई योजना अचानक बिखर जाती है।
कोई नौकरी हाथ से निकल जाती है,
कोई रिश्ता टूट जाता है,
कोई अवसर अंतिम क्षण में छूट जाता है,
कोई यात्रा रद्द हो जाती है या
जिस मंज़िल को पाने के लिए वर्षों मेहनत की हो, वही हमसे दूर चली जाती है।

उस समय मन में एक ही प्रश्न उठता है-“मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ?”

लेकिन समय बीतने के बाद कई बार वही घटना हमें एक बिल्कुल अलग अर्थ समझाती है।
जापान की एक लोकप्रिय लोककथा भी इसी विचार को बहुत सुंदर ढंग से व्यक्त करती है-यदि आपकी बस छूट जाए, तो संभव है कि जीवन आपको किसी अनदेखे खतरे से बचा रहा हो। इसका अर्थ यह नहीं कि हर असफलता के पीछे कोई चमत्कार छिपा है, बल्कि यह कि हर घटना का पूरा अर्थ हमें उसी क्षण दिखाई नहीं देता।

हमारी सबसे बड़ी परेशानी शायद यही है कि हम जीवन को अपनी बनाई हुई योजना के अनुसार चलते देखना चाहते हैं। हमने मन में एक नक्शा बना रखा है-
किस उम्र में पढ़ाई पूरी होगी।
कब नौकरी मिलेगी।
कब विवाह होगा।
कितनी सफलता मिलेगी और
जीवन किस दिशा में जाएगा।

जैसे ही वास्तविकता उस नक्शे से अलग होती है, हमें लगता है कि हम हार गए।

पर जीवन सीधी सड़क कहाँ है?

कभी वह नदी की तरह अचानक दिशा बदलता है, कभी पहाड़ सामने खड़ा कर देता है और कभी उसी रास्ते का दरवाज़ा बंद कर देता है जिस पर हम पूरी शक्ति से दस्तक दे रहे होते हैं।

हर बंद दरवाज़ा हमारी योग्यता का निर्णय नहीं होता।

किसी नौकरी में चयन न होना यह प्रमाण नहीं कि हम अयोग्य हैं। किसी व्यक्ति का हमारे जीवन से चले जाना यह सिद्ध नहीं करता कि हम प्रेम के योग्य नहीं हैं। किसी प्रयास का असफल होना यह नहीं बताता कि हमारी यात्रा समाप्त हो गई।

कई बार जीवन केवल इतना कह रहा होता है-“यह रास्ता तुम्हारा नहीं है, थोड़ा आगे चलो।”
हम पीछे मुड़कर देखें तो शायद अपने जीवन में भी ऐसी घटनाएँ मिल जाएँगी जिन्हें कभी हमने दुर्भाग्य माना था, लेकिन बाद में वही वरदान सिद्ध हुईं।

जिस कॉलेज में प्रवेश नहीं मिला, उसने शायद किसी दूसरे शहर और नए अवसर का रास्ता खोला।
जिस नौकरी के न मिलने पर हम दुखी हुए, शायद उसी ने बेहतर करियर की राह खोली हो।
जिस रिश्ते के टूटने पर लगा कि जीवन समाप्त हो गया, उसने शायद हमें स्वयं को पहचानना सिखाया हो।

यही जीवन की विडंबना भी है और सुंदरता भी-घटना पहले घटती है, उसका अर्थ कई बार बहुत बाद में समझ आता है।

इसका अर्थ भाग्यवाद नहीं है। हमें हाथ पर हाथ रखकर यह नहीं सोचना चाहिए कि जो होना होगा, हो जाएगा। प्रयास करना हमारा कर्तव्य है। गिरने के बाद उठना, गलती से सीखना और अगला रास्ता खोजना भी हमारी ही जिम्मेदारी है। लेकिन जहाँ हमारा नियंत्रण समाप्त हो जाए, वहाँ स्वयं को दोष देते रहना केवल पीड़ा बढ़ाता है।

यहीं स्वीकार्यता की आवश्यकता होती है।
स्वीकार्यता हार मानना नहीं है। इसका अर्थ है-जो बदल नहीं सकता, उसके विरुद्ध अपनी पूरी मानसिक ऊर्जा नष्ट करने के बजाय यह पूछना, “अब यहाँ से मैं क्या कर सकती/सकता हूँ?”
यह छोटा-सा प्रश्न हमें पीड़ित की भूमिका से निकालकर फिर से जीवन का सहभागी बना देता है।
आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया ने हमें सफलता का एक खतरनाक अर्थ भी सिखा दिया है-हर चीज़ समय पर मिलनी चाहिए।
दूसरों की उपलब्धियाँ देखकर हमें लगता है कि हम पीछे रह गए।
किसी की नौकरी पहले लग गई,
किसी का घर पहले बन गया,
किसी के बच्चे सफल हो गए और
किसी ने हमसे कम उम्र में बहुत कुछ हासिल कर लिया।

लेकिन जीवन कोई सौ मीटर की दौड़ नहीं है जिसमें सभी की शुरुआत और अंतिम रेखा एक ही हो।
हर व्यक्ति की घड़ी अलग है,
हर व्यक्ति का रास्ता अलग है और
हर व्यक्ति की मंज़िल भी अलग हो सकती है।

इसलिए जो अभी नहीं मिला, उसे हमेशा के लिए खोया हुआ मत मानिएऔर जो चला गया, उसे हमेशा दुर्भाग्य मत समझिए।

कुछ विदाइयाँ हमें खाली करती हैं ताकि जीवन में किसी बेहतर चीज़ के लिए जगह बन सके। कुछ असफलताएँ हमारे अहंकार को तोड़ती हैं ताकि हमारी वास्तविक क्षमता बाहर आ सके। कुछ रास्ते बंद होते हैं ताकि हम उस दिशा में चलें, जिसे हमने कभी देखने की कोशिश ही नहीं की थी।

जब अगली बार कोई योजना बिगड़ जाए, कोई अवसर हाथ से निकल जाए या जिंदगी अचानक रास्ता बदल दे, तो दुखी होना स्वाभाविक है। अपने दुख को महसूस कीजिए, लेकिन उसी क्षण अपने पूरे भविष्य का फैसला मत कर दीजिए।

थोड़ा समय दीजिए।
हो सकता है आज का “क्यों?”, कल का “अच्छा हुआ!” बन जाए।
जीवन पर इतना भरोसा अवश्य रखिए कि हर मोड़ का अर्थ उसी मोड़ पर समझ आना आवश्यक नहीं।

क्योंकि कभी-कभी जिस बस के छूट जाने पर हम देर तक पछताते हैं, वही हमें किसी अनदेखे हादसे से बचा रही होती है। जिस दरवाज़े के बंद होने पर हम रोते हैं, उसके आगे शायद कोई ऐसी राह खुल रही होती है जिसकी हमने कल्पना तक नहीं की थी।

इसलिए प्रयास करते रहिए, उम्मीद बनाए रखिए और जीवन के अनचाहे मोड़ों से घबराइए मत।
हर छूटी हुई मंज़िल हार नहीं होती, हर बंद दरवाज़ा अंत नहीं होता। कभी-कभी ज़िंदगी हमारी योजना इसलिए बदलती है क्योंकि शायद उसे हमसे बेहतर रास्ता दिखाई दे रहा होता है।

~ डॉ. रीटा अरोड़ा, सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर, करनाल

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