कविता
ईश्वर के कण
जयपाल
यह बात तो सब जानते हैं
कि ईश्वर कण-कण में व्याप्त है
लेकिन वे कण कहाँ व्याप्त हैं
कोई नहीं जानता
इसके लिए
अभी और अधिक खून बहाना होगा
बस्तियाँ जलानी होंगी
घरों पर चलाने होंगे बुलडोज़र
इंसानियत को करना होगा जमींदोज
कुछ देशों को तबाह करना होगा
बनाना होगा अखंड राष्ट्र
तब जाकर मिलेगा ईश्वर
और वे कण भी
जिनमें ईश्वर रहता है
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